एक बार फिर से भाजपा का साथ छोड़ महागठबंधन में शामिल होंगे नीतीश कुमार !

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : बिहार में एनडीए के प्रमुख घटक दल जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने जब से चार राज्यों में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लडऩे का ऐलान किया है, तब से भाजपा से उसके संबंधों में दरार की संभावनाओं को काफी बल मिला है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार एक बार फिर से भाजपा का साथ छोड़ महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस मुद्दे पर जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में विस-लोस मुद्दों पर होगी चर्चा

दिल्ली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होनी है। बैठक में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव समेत कई मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसके बाद नीतीश कुमार अपनी पार्टी की मौजूदा स्थितियों को स्पष्ट करेंगे। शनिवार को उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों के साथ भी बैठक की थी। जदयू के सूत्रों के मुताबिक पार्टी नीतीश कुमार को एनडीए गठबंधन के साथ-साथ पार्टी के सर्वोत्तम हित में निर्णय लेने के लिए एक प्रस्ताव पारित करेगी।

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क्या महागठबंधन में शामिल होगा जद (यू)

गौरतलब है कि जदयू ने चार राज्यों में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लडऩे का ऐलान पर भाजपा को जो तेवर दिखाया है, उससे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के साथ उसके गठबंधन की संभावनाओं को नि:संदेह ही बल मिला है। हालांकि जदयू इस बात को खारिज कर चुका है कि वो फिर से महागठबंधन में शामिल होगा। वहीं, भाजपा ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि राजग के सभी घटक दल उसके साथ हैं और 2019 में सब मिलकर चुनाव लडक़र फिर से सरकार बनाएंगे।

देशभर में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है जद (यू)

जदयू के अलग चुनाव लडऩे के फैसले से इतना तो स्पष्ट है कि पार्टी अब सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, वो अब देशभर में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है। ज्ञात हो कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बिहार की 40 सीटों में से 22 मिली थी। दो पर जद(यू) के उम्मीदवार चुनाव जीते थे। यह चुनाव शरद यादव और नीतीश कुमार की जद(यू) ने अकेले दम पर लड़ा था। ठीक ऐसे ही पार्टी ने अब देशभर में अपने जनाधार को बढ़ाने के लिए अलग चुनाव लडऩे का फैसला किया है।