कभी भूल से भी न रखें अपने बच्चों का ये नाम, पूरी जिंदगी झेलनी पड़ेगी परेशानियां

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : दुनिया में हर व्यक्ति जब जन्म लेता है तो उसे एक नाम मिलता है ये नाम उस बच्चे के जन्म लेते ही उसके घर वाले रखते हैं। नाम किसी भी इंसान की पहचान होती है, जब एक शिशु का नाम रखा जाता है तो उसके साथ कई उमीदें भी जुड़ जाती हैं कि आगे चलकर वह अपना और अपने परिवार का नाम रौशन करेगा और अपनी एक अलग पहचान बनाएगा पर क्या आपको ये पता है कि नाम का प्रभाव इंसान पर पड़ता है इसलिए किसी भी बच्चे का नाम सुनने के लिए बहुत सी बातों का ध्यान में रखा जाता है।  यह सही है कि कोई भी अपने बच्चों के नाम रावण, लंकेश, कंस, दुर्योधन, द्रोपदी, मंदोदरी, पंचाली, महिषासुर आदि नहीं रखता, लेकिन जो लोग ईश्वर, शिव, विष्णु, महादेव, सदाशिव, सच्चिदानंद, भगवती, ओम, गणेश, हरि आदि नाम रख रहे हैं वे भी गलती कर रहे हैं। किसी भी देवी या देवता पर नाम नहीं रखना चाहिए।

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नाम से स्पष्ट हो पहचान

बहुत से लोग अपने बच्चों के नाम ऐसे रखते हैं जिससे यह विदित नहीं होता कि यह नाम किस भाषा का है, जैसे जिया, मुस्कान, आलिया, समीर, ईशा, कबीर, नावेद, रूबिना, अनीश, करीना, करिज्मा, रैयान, झ्याना, वामिल आदि। हालांकि टोनी, लवी, लकी, स्विटी, राजू, गुड्डु, गोलू, पप्पू, छोटू, गीगा, बाबू, चंकी आदि नाम भी नहीं रखना चाहिए। धीरे-धीरे बच्चे का वहीं नाम हो जाता है। इससे बुरा असर होता है। ऐसे में बच्चे के बड़े होने पर भी वही नाम रहता है। हां, किसी नाम का शॉर्ट कर सकते हैं, लेकिन बिगड़े हुए रूप में नहीं। बच्चे का नाम उसकी पहचान के लिए रखा जाना चाहिए। मनोविज्ञान एवं अक्षर-विज्ञान के जानकारों का मत है कि नाम का प्रभाव व्यक्ति के स्थूल-सूक्ष्म व्यक्तित्व पर गहराई से पड़ता रहता है।

एक ही नाम होना चाहिए

कुछ लोग अपने बच्चों के दो या तीन नाम रखते हैं, जैसे घर का नाम अलग और बाहर का अलग। जन्म नाम अलग और राशि नाम अलग। इससे बच्चे के भविष्य पर असर पड़ता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से यह उचित नहीं है, क्योंकि ऐसा व्यक्ति हमेशा कंन्फ्यूज रहता है, उसके दिमाग में द्वंद बना रहता है। एक ऐसा नाम होना चाहिए जो घर और बाहर दोनों ही जगह पर प्रचलित हो। ऐसा माना जाता है कि राशि के अनुसार रखे गए नाम से बच्चे को बुलाने पर उस पर अच्छा असर होता है। लडक़े का नाम तो आयु-पर्यंत वही रहता है, लेकिन लडक़ी का नाम उसके विवाह के बाद ससुराल वाले बदल देते हैं। यह एक गलत प्रथा है इससे उस लडक़ी और जिससे उसने विवाह किया दोनों पर बुरा असर हो सकता है। लडक़े पर न भी हो, लेकिन लडक़ी की मानसिकता पर इसका असर पड़ता है।

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जरूर करें नामकरण संस्कार

अधिकतर हिंदू नामकरण संस्कार नहीं करते और न ही वे नाम को लेकर गंभीर हैं। नामकरण संस्कार करना जरूरी है। नामकरण संस्कार करते वक्त बच्चों के नाम संस्कृत या हिंदी शब्दों अनुसार ही रखना चाहिए। भाषा का नाम से गहरा संबंध होता है। भाषा ही बच्चों को उनके धर्म, संस्कृति, देश और संस्कार से जोड़े रखती है। यदि आप अपने बच्चे का नाम अपनी भाषा को छोडक़र किसी विदेशी भाषा में रखते हैं, तो आप अपने बच्चे का भविष्य बिगाडऩे के जिम्मेदार होंगे। अत: नामकरण संस्कार जरूर करें और नामकरण संस्कार किसी शुभ दिन और शुभ मुहूर्त में किया जाना चाहिए।

नामकरण करने में बरतें सावधानी

बच्चों के नामकरण के लिए पंडित और धर्मग्रंथ का ही सहारा लेना चाहिए इंटरनेट का नहीं। नाम चयन करते वक्त उसके अर्थ को भली-भांति समझ लें और यह भी तय कर लें कि उसके उच्चारण में कठिनाई तो नहीं होती। नाम रखते वक्त यह ध्यान रहें कि नाम बुलाने में सरल, आसान और अर्थपूर्ण होना चाहिए। बच्चों के नाम ऐसे रखें जिस पर उन्हें गर्व हो। नाम रखते समय कई लोगों से सलाह लें। नाम के अक्षर दो, तीन या चार होना चाहिए इस पर भी विचार किया जाना चाहिए। नाम में बहुत कुछ रखा है। उसी से बच्चा का संपूर्ण भविष्य तय होता है। इस तथ्य को अच्छे से जानना जरूरी है।