मुक्तेश्वर घूमने आएं तो इन स्थानों पर घूमें जरूर, एडवेंचर और नेचर लवर्स लिए बना है यह क्षेत्र

1455
Facebooktwittergoogle_pluspinterest

मुक्तेश्वर- न्यूज टुडे नेटवर्क: देवभूमि उत्तराखंड की मनोहर वादियों की कशिश ही कुछ ही ऐसी है कि दुनिया भर से सैलानी इनकी एक झलक पाने को बेताब नजर आते हैं। देवदार, बंज, खारसु, तिलोंज, कफल, पाइन, यूटीस और मेहल के सुंदर और घने आरक्षित वनों से घिरा मुक्तेश्वर समुन्द्र सतह से 2286 मीटर (7500 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। प्रकृति के बेहतरीन नजारों के साथ ही मुक्तेश्वर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ब्रिटिश दौर में विकसित इस खूबसूरत हिल स्टेशन मुक्तेश्वर को “मुक्ति के ईश्वर” भगवान शिव का घर कहा जाता है । मुक्तेश्वर में भगवान शिव का 10 वी सदी पूर्व कत्युरी राजाओं द्वारा बनाया गया भव्य “मुक्तेश्वर महादेव मंदिर” स्थित है ।

यह हैं मुक्तेश्वर के पर्यटक स्थल

 

सीतला- खूबसूरत हिल स्टेशन

सीतला एक सुंदर हिल स्टेशन है जो 7000 फुट की ऊँचाई पर स्थित है जो मुक्तेश्वर के पास स्थित एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। यह हिल स्टेशन 39 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और विशाल हिमालय का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। यह हिल स्टेशन ओक और देवदार के सदाबहार जंगलों से ढंका हुआ है।

यह भी पढ़ें-रामनगर-पवलगढ कंजर्वेशन रिजर्व बना पर्यटकों के लिए खास, यहां दिखते हैं दुर्लभ प्रजाती के खूबसूरत पशु-पक्षी

चौथी जाली या चौली की जाली

मुक्तेश्वर मंदिर के पास स्थित चौथी जाली या चौली की जाली अपनी किवदंतियों के लिए प्रसिद्द है। ऐसा कहा जाता है कि यहाँ देवी और राक्षस के बीच एक युद्ध हुआ था। एक ढाल, हाथी की सूंड और तलवार की एक हल्की रेखा आज भी देखी जा सकती है। आप यहां रॉक क्लाइम्बिंग, जिप-लाइनिंग और रैपलिंग जैसे अडवेंचर स्पोर्ट्स का भी लुत्फ उठा सकते हैं।

ब्रम्हेश्वर मंदिर

ब्रम्हेश्वर मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जिसका निर्माण 1050 में हुआ था। इस मंदिर की सैर के दौरान पर्यटक पत्थर की अनेक मूर्तियों और नक्काशियां देख सकते हैं। भारत की दूसरी सर्वोच्च चोटी नंदा देवी की झलक भी मुक्तेश्वर की वादियों से देखी जा सकती है।

यह भी पढ़ें-पिथौरागढ़ का यह स्थान है पर्यटकों के लिए लाजवाब, ऐसे करें होम स्टे के लिए ऑनलाइन बुकिंग

राजारानी मंदिर

मुक्तेश्वर का प्राचीन राजारानी मंदिर भी सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। इस मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी में हुआ था और यहाँ पत्थर की सुंदर मूर्तियाँ हैं।

भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI)

भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) एक विरासत औपनिवेशिक संगठन है जिसकी स्थापना 1893 में हुई थी। यह भारत में पशुचिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह संस्थान जीवाणु विज्ञान, अनुवांशिकी और पशु पोषण में विस्तृत अनुसंधान कर रहा है। परिसर में स्थित पशुचिकित्सा संग्रहालय और पुस्तकालय की सैर भी की जा सकती है।

भालूगढ़ का झरना

मुक्तेश्वर से धारी गांव के बीच 7 किलोमीटर का सफर तय करें और फिर वहां से घने जंगलों के बीच ट्रेकिंग शुरू होती है जो आपको खूबसूरत झरने तक ले जाएगी। नेचर लवर और बर्ड वॉचिंग पसंद करने वालों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।

कपिलेश्वर मंदिर

भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए बेहद खूबसूरत 9 किलोमीटर का पहाड़ी सफर तय करना पड़ता है। सड़क मार्ग के जरिए भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर कुमिया और सकुनी नदियों के मुहाने पर स्थित है।

कैसे पहुंचे मुक्तेश्वर

दिल्ली से मुक्तेश्वर पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका है सड़क मार्ग। आप सड़क मार्ग के जरिए 7 घंटे में दिल्ली से मुक्तेश्वर पहुंच सकते हैं। कुमाऊं के द्वार हल्द्वानी के काठगोदाम से वाया भवाली -रामगढ यहाँ पहुंचना नेचर लवर्स के लिए किसी सौगात से कम नही है।

कब जाएं मुक्तेश्वर

मुक्तेश्वर जाने का बेस्ट समय मार्च से जुलाई के बीच है। गर्मियों में यह क्षेत्र किसी जन्नत से कम नही है। बर्फबारी के शौकीन यहाँ जनवरी-फरवरी के बीच आ सकते हैं।