अनूठी पहल : अब उत्तर प्रदेश में शादी के कार्ड पर छापना होगा वर-वधू का जन्म प्रमाण पत्र !

80
Facebooktwittergoogle_pluspinterest

लखनऊ- न्यूज टुडे नेटवर्क। बाल विवाह गैर-कानूनी होने के बावजूद आज भी भारत में पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। तमाम प्रयासों के बाद भी इस भयावह स्थिति पर विराम नहीं लग पा रहा है। समस्या को जड़ से मिटाने के लिए श्रावस्ती डीएम दीपक मीणा ने नई तरकीब निकाली है। अब शादी के कार्ड पर प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को वर-वधू की जन्म तिथि भी अंकित करनी होगी। इतना ही नहीं प्रिंटिंग प्रेस संचालक को वर-वधू की आयु प्रमाण पत्र से संबंधित अभिलेख भी अपने पास सुरक्षित रखने होंगे। इसके लिए प्रिंटिंग प्रेस संचालकों के साथ बैठक कर दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
कि बाल विवाह रोकने की अनूठी पहल शादी के कार्ड पर छापना होगा…

card

बचपन में ही कर दिया जाता है बेटियों का विवाह

श्रावस्ती जिले में बाल विवाह की कुप्रथा वर्षों से चली आ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस)- 4 के आंकड़े बताते है कि यहां 70 प्रतिशत से भी अधिक बेटियों का बचपन में ही विवाह कर दिया जाता है। ग्रामीण अंचलों की 70.6 प्रतिशत और शहरी इलाके की 68.5 फीसद बेटियों का बाल विवाह होता है। इतना ही नहीं ग्रामीण क्षेत्र की 7.5 फीसद और शहरी क्षेत्र की 7.0 प्रतिशत बेटियां 15 से 19 वर्ष की आयु वर्ग में ही मां बन जाती हैं।

अधिकांश मामले पिछड़े परिवारों में दिखाई देते हैं

बाल विवाह के अधिकांश मामले सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों में देखे जाते हैं। ऐसे परिवार बेटी के बड़े हो जाने पर अपनी आर्थिक स्थिति के अनुकूल योग्य वर पाने में खुद को अक्षम महसूस करता है। वर पक्ष को भी डर रहता है कि बेटा बड़ा हो गया तो उसके उम्र की दुल्हन आसानी से ढूढ़े नहीं मिलेंगी।

child_marraige_3

नहीं रुक रहे बाल विवाह

समाज में बीमारी की तरह मजबूती से पैठ बनाए बैठी दहेज जैसी कुप्रथा भी बाल विवाह के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। गरीब बेटियों के हाथ पीले करने में पैसों की कमी आड़े न आए इसके लिए सरकार की ओर से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, शादी अनुदान आदि योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद बाल विवाह रुक नहीं रहा है।