निर्भया के दरिंदों पर निकला एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत का गुस्सा, सुनाई ऐसी आपबीती

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मुंबई- न्यूज टुडे नेटवर्क: 16 दिसम्बर 2012 की देर शाम देश की राजधानी दिल्ली में पैरामेडिकल की छात्रा के साथ 6 दरिदों ने जो बेहशीपन किया था उसे आज तक देश भूल नही पाया है। आखिर भूले भी तो कैसे, क्योंकि 6 साल बाद भी आज तक निर्भया के दरिंदों को वो सजा नही मिल पाई है जिसके वो हकदार हैं। भले ही कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के गुनहगारों की फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैंसला सुनाया हो बावजूद इसके निर्भया के माता-पिता ने दोषियों को जल्द से जल्द फांसी दिलाने की मांग की है।

इस बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत ने भी निर्भया से जुड़े अपने इमोशन्स को शेयर किया है। मल्लिका के मुताबिक वो ऐसे विश्व को देखने की कामना करती हैं, जिसमें महिलाएं डर से आजाद रहें और उनका जीवन बंधनमुक्त हो। ट्विटर पर एक भावुक पोस्ट जारी कर मल्लिका शेरावत ने समाज में महिलाओं के सामने पेश आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया।

जब होगी दरिंदों को फांसी तभी मिलेगा सम्पूर्ण न्याय

सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड की पीड़िता निर्भया का जिक्र करते हुए मल्लिका ने लिखा है कि उसने महिलाओं के लिए बनाए गए नियमों से खुद को आजाद करने के लिए कड़ी मेहनत की। उसके परिजनों ने हर कदम पर उसका साथ दिया लेकिन जिन्होंने उसके साथ यह हिंसा की, उन्होंने नैतिकता और रात में घर से बाहर रहने के उसके अधिकार पर सवाल खड़े कर दिए।

मल्लिका ने कहा कि कुछ लोगों ने इसके बाद यहां तक कहा कि वह इसी काबिल थी। दोषियों को जिस दिन फांसी दी जाएगी, उसके परिवार की लड़ाई तभी खत्म होगी, लेकिन निर्भया की आत्मा आज मुक्त हो गई। महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली मल्लिका ने उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें 26 लड़कियों को मानव तस्करी से बचाया गया।

पितृसत्तामक परिवार की बंदिशें तोड़ जब निकली आगे

मल्लिका के मुताबिक पितृसत्तामक परिवार में रहने से मेरे पास न ही आजादी थी और न ही अधिकार। मैंने कई मुश्किलें झेली क्योंकि मैंने सवाल करने की हिम्मत की। मुझे जब मौका मिला, तो मैं इतनी तेजी से भागी जितना मेरे पैरों से संभव था। आज मैं अपने दोनों पैरों पर खड़ी हूं और फैसला कर सकती हूं कि मैं अपना जीवन कैसे बिताऊंगी।

मल्लिका कहती हैं कि उनका सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि विश्व भर में महिलाओं को सामाजिक दबाव तले दबाया जाता है, परिस्थितियों से डराया जाता है। महिलाएं आजाद होना चाहती हैं। मल्लिका ने कहा कि वह महिलाओं की मदद करना चाहती हैं और उन्हें चिंता तथा डर से मुक्त देखना चाहती हैं।