इस गांव के स्कूल के बच्चे दोनों हाथों से एकसाथ लिखते हैं पांच भाषाएं, खबर पढ़कर गर्व होगा

113
Facebooktwittergoogle_pluspinterest

[न्यूज टुडे नेटवर्क]. दोनों हाथों से एक साथ लिखने का हुनर. यह कोई मूवी में दिखाया गया सीन नहीं. बल्कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के छोटे से गांव बुधेला में 100 बच्चों के रोजमर्रा का काम है. यहां के वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल में छात्र इस काम में इतने एक्सपर्ट हो गए हैं कि कंप्यूटर के की-बोर्ड से भी तेज रफ्तार से उनकी कलम चलती है. जिस काम को करने के लिए सामान्य बच्चे घंटो लगा देते हैं उसे ये बच्चे मिनटों में कर दिखाते हैं.

इस स्कूल में इन बच्चों को करीब डेढ़ घंटे तक रोज योग, ध्यान कराया जाता है. जिससे इन्हें दोनो हाथों से एक साथ लिखने की याद रखने की क्षमता बढ़ती रहे.

पांच भाषाएं भी लिख लेते हैं.

वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल के ये बच्चे पांच भाषाएं(हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, स्पेनिश, संस्कृत) लिख लेते हैं. वो भी दोनों हाथों से. 1 से 100 तक की गिनती उर्दू में 45 सेकंड में, 1 मिनट में रोमन, 1 मिनट में देवनागरी लिपि भाषा में, 1 मिनट में दो भाषाओं के 250 शब्दों का अनुवाद कर देते हैं. एक हाथ से 2 का पहाड़ा लिखते हैं तो दूसरे हाथ से 3 का पहाड़ा. वाकई में इनका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है.

यह भी पढ़े- इस स्टेशन पर सिर्फ एक बच्ची के लिए रोजाना आती है ट्रेन, वजह जानकर ‘भारत सरकार’ से नफरत करोगे

वीरंगद शर्मा

इस निजी स्कूल की नींव यहीं के निवासी वीरंगद शर्मा ने एक रोचक सोच के साथ आठ जुलाई 1999 को रखी थी. वह बताते हैं एक दिन जबलपुर रेलवे स्टेशन पर एक पुस्तक में मैंने पढ़ा कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद दोनों हाथ से लिखते थे. वीरंगद ने देश के इतिहास की बात को वर्तमान में सार्थक करने की ठान ली थी. पहले खुद दोनों हाथों से लिखने का प्रयास किया लेकिन खास सफलता नहीं मिली. बच्चों पर प्रयोग आजमाया. बच्चे सीखने में अव्वल निकले. इसी से सीख लेकर बच्चों की लेखन क्षमता बढ़ाने का प्रयास शुरू किया. अब आलम यह है कि 11 घंटे में बच्चे 24 हजार शब्द तक लिख लेते हैं.

यह भी पढ़े- होटल के कमरे में यौन शक्ति बढ़ाने वाला इंजेक्शन लगाने से प्रेमिका की मौत, प्रेमी फरार

विदेश तक में धाक

लायंस क्लब के अंतरराष्ट्रीय चेयरमैन जेनिस रोज अमेरिका से यहां 2004-05 में कुछ जापानी मित्रों के साथ आए थे. तीन दिन रहने के बाद बच्चों को अपने साथ वाराणसी ले गए थे. जहां एक समारोह में इन बच्चों के हुनर को दिखाया गया. समारोह को संबोधित करते हुए जेनिस रोज ने कहा था कि भारत में दुनिया का यह 9वां अजूबा है. जर्मनी, अमेरिका और अन्य कई देशों के शिक्षाविद यहां आ चुके हैं और वे वीरंगद के संपर्क में रहते हैं.

यह भी पढ़े- सावधान : किसी की भी फोटो लगाकर, सिर्फ 3 स्टेप में बना रहे हैं फर्जी पॉर्न…