हल्द्वानी- ‘उत्तरायणी त्यार’ में कवियों ने सुनाई ऐसी कविताएं, जीवंत हुआ पहाड़, श्रोता हुए झूमने पर मजबूर

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हल्द्वानी- संजय पाठक:  पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच हीरानगर में चल रहे 8 दिवसीय उत्तरायणी मेले (घुघुतिया त्यार) के पांचवे दिन 12 जनवरी को कुमाऊंनी कवियों की धूम रही। एक से बढकर एक कविताओं के संग हास्य व्यंग्य परोसे गये। करीब दो दर्जन कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

कुमाऊंनी संस्कृति और संस्कारों के संवर्धन के लिए हर साल पर्वतीय उत्थान मंच द्वारा कुमाऊंनी कवि सम्मेलन आयोजित किया जाता है। यही वजह है कि काव्य गोष्ठी में कवियों के अभिव्यक्ति को सुनने के लिए दूर दूर से लोग पहुंचते हैं। शुक्रवार को सम्पन्न हुई काव्य गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ कवि डॉ. प्रदीप उपाध्याय और अध्यक्षता वरिष्ठ कवि जुगल किशोर पेटशाली ने की।

इसके बाद शुरू हुआ कवियों का धमाल, जी हाँ एक- एक कर कवियों ने अपने साहित्यिक तरकश से ऐसे तीर छोड़े जो सीधे श्रोताओं के दिल पर लगे और पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वरिष्ठ कवि और कुमगढ कुमाऊंनी मासिक के सम्पादक दामोदर जोशी ‘देवांशु’ ने ‘ठंडी छ हवा ठंडौ छो पाणी , माया पहाडेकि कैले नि जाणी’…सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

वरिष्ठ कवियित्री तारा पाठक ने ‘आमा त्यर नाम कै छ, दै नाती नामै नाम भै’ सुनाकर पहाड़ की मातृशक्ति की महत्ता का बखान किया। वरिष्ठ कवि और कवि सम्मेलन के संयोजक नारायण सिंह बिष्ठ ‘नरैण दा’ ने ईजा पर मार्मिक कविता ‘ईजा त्यर दुख कैल याँ जाणि, टुप टुप कनै , आँख में पाँणि’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।

कुमाऊंनी कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते वरिष्ठ कवि भुवन काण्डपाल ‘शून्य’, साथ में मंच पर आसीन कविगण

‘ब्यारियो कौ पैलाग’ संग ‘आहा रे जमाना’ पर झूमे श्रोता

जैसे ही कुमाऊं के चर्चित कवि शंकर दत्त जोशी ‘पनुवा’ ने अपना काव्य पाठ शुरू किया पूरा पंड़ाल तालियों की गूंज से भर उठा। कवि शंकर दत्त जोशी ने ‘ब्यारियो कौ पैलाग’ सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। सोशल मीडिया में अपने हास्य व्यंग्यों से धमाल मचाने वाले हरिद्वार निवासी वरिष्ठ कवि विनोद पंत की कविता ‘आहा रे जमाना देखो कस देखो मिजात रे, निगुर जमाना ऐगो शरम ना लाज रे’ सुनाई जिसे श्रोताओं खूब पसंद किया। पहाड़ की भाषा -बोली को सोशल मीडिया के माध्यम से आगे बढाने का बीढा उठाने वाले युवा कवि राजेन्द्र ढैला ने ‘अब हराण फैगे म्यर पहाडेक शान लोग कौनी कलयुग ऐगो ‘ सुनाई , जिसे खूब सराहा गया।

युवा कवि त्रिवेन्द्र जोशी की कविता साल में द्विचार दिन तक ध्याव में आओ को भी श्रोताओं ने खूब पसंद किया। पहाड़ की नारी के जीवन को समेटती ‘म्यर गांवेकि ईजा पहाडेकि ईजा’ सुनाकर कवि डॉ. प्रदीप उपाध्याय ने श्रोताओं को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। कवियित्री डॉ. भगवती पनेरू ने यो मेरो उत्तराखंड़ दैप्तों की भूमि छू सुनाई। कवि भुवन कांडपाल शून्य ने पिता पर ‘यस करौ च्यैला यस करौ च्यैला ‘ सुनाकर माहौल को मार्मिक कर दिया।

कुमाऊंनी ज्यूल जमा जब रंग…

वरिष्ठ कवि मोहन कुमाऊंनी ने ‘बैर भगनौल’ सुनाकर एक बार फिर कुमाऊंनी परम्परा को जीवंत कर दिया। इस दौरान उनके साथ श्रोताओं ने भी बैर गुनगुनाया। वरिष्ठ कवि जगदीश जोशी ने उत्तरायणी पर कौव हरै गो सुनाकर वर्तमान परिदृश्य पर शानदार व्यंग्य किया। वरिष्ठ कवियित्री विजया कुमारी मुक्ता ने पर्यावरण पर ‘यो दुणी मैं अणकसी हरै, पंछी जां काँ हरैं गीं’ सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।

कणिक बर जोरदार छैं रतन ज्यु…

वरिष्ठ कवि रतन सिंह किरमोलिया के ‘कणिक भूख पैट कैं चैं एक गास और भरी पेट के चैंन हरो सारे आगास’ पर भी जनता झूमने को मजबूर हो गई। एमबीपीजी कालेज की अध्यापिका कवियित्री डॉ. दीपा गोवाड़ी ने ‘श्री बागनाथ ज्यूक धाम में ऐगो उत्तरायणी धाम’ सुनाकर पहाड़ की संस्कृति को जीवंत किया। युवा कवि सुंदर लाल मदन ने पर्यावरण पर ‘पोलीथिन हटाओ रे’ सुनाकर खूब तालियाँ बटोरी। कवियित्री विद्या महतोलिया ने भी पर्यावरण ‘आजकल हमर शहर में स्वच्छता अभियान चल रो, दोहराक घर में कुण खितनक रिवाज चल रौ’ , सुनाकर समाज की व्यवस्थाओं पर तीखा व्यंग्य किया।

यां लै मेरि पछ्याँण वां लै मेरि पछ्याण…

 भीमताल के वरिष्ठ कवि नारायण बानठौकी ने मौतियाक दुल्हैणी सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। नैनीताल से आये कवि नवीन पाण्डे ने जुगाड़ शीर्षक पर ‘यां लै मैरि पछ्याण, वां लै मेरि पछ्याण’ सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। युवा कवि नितेश काण्डपाल ने ‘ मनोदशा एकल चलैक’ सुनाकर दर्शकों की तालियाँ बटोरी। वरिष्ठ कवि विनायक जीवन चन्द्र जोशी ने पहाड़क धात सुनाकर श्रोताओं को ध्यान खींचा। वरिष्ठ कवि माधवानन्द लोहनी ने पहाड़ के दर्द को समेटती सुन्दर कविता की प्रस्तुति दी।

लालकुंआ के वरिष्ठ कवि मोहन चन्द्र जोशी ‘मोहनदा’  ने घुघुती त्यार पर प्रस्तुति देते हुए उत्तराखंड़ी संस्कृति से रूबरू करवाया। युवा कवि संजय पाठक ने ‘सिद साद लोग रौनी पहाड़ाक नानु नान घरौं मे, आहा कतु भल लांगू देवभूमि में’ सुनाकर पहाड़ को जीवंत कर दिया। वरिष्ठ कवि लछीराम कलाकार ने अपनी सुरीली आवाज में ‘बुबुक और नातीक बात ‘ सुनाकर श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया।

SanjayPathakHaldwani

कार्यक्रम के समापन पर सभी कवियों को मंच के अध्यक्ष डॉ. चन्द्रशेखर तिवारी की ओर से सम्मानित किया गया। इस अवसर डॉ. चन्द्रशेखर तिवारी ने सभी आगन्तुक कवियों को आभार जताते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। कवि सम्मेलन को सफल बनाने में पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच परिवार के पदाधिकारियों ने खूब मेहनत की। बता दें कि 8 जनवरी से शुरू हुआ ‘उत्तरायणी त्यार’ आगामी 15 जनवरी को सम्पन्न होगा। ऐसे में अगर आप भी उत्तराखंड़ी संस्कृति के रंग में रंगना चाहते हैं तो चले आइये पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच , यहाँ आपकी ख्वाहिश जरूर पूरी होगी।