पंतनगर: चिकन के शौकीनों को अब ये मुर्गा देगा सेहत का तोहफा, खूबी जानकर लेने दौड़ पड़ेंगे

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पंतनगर- न्यूज टुडे नेटवर्क: चिकन के शौकीन लोगों के लिए यह खबर किसी खुशखबरी से कम नही है। अगर आप चिकन खाने के साथ-साथ अपनी सेहत को भी संवारना चाहते हैं तो अब पंतनगर विश्वविद्यालय आपको सौगात देने जा रहा है। अपने औषधीय गुणों की वजह से मशहूर कड़कनाथ मुर्गे के संवर्धन में पंतनगर विश्वविद्यालय जुटा हुआ है।

अपनी औषधीय खुबियों की वजह से कड़कनाथ मुर्गा की है देशभर में भारी डिमांड

बता दें कि अब तक केवल उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में ही कड़कनाथ के अंडे और काले मांस की सप्लाई की जा रही थी। पंतनगर विश्वविद्यालय का यही प्रयास है कि देशभर के चिकन के शौकीन कड़कनाथ मुर्गे के गुणकारी मांस और अंडों का लुफ्त उठा सकें।

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले की प्रजाति है कड़कनाथ

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में कड़कनाथ, मुर्गियों की एक खास प्रजाति है जो भील एवं भिलाला जनजातियों के लोग पालते हैं। अपनी खुबियों के चलते कड़कनाथ मुर्गे का मांस और अंडा महंगी दरों (मीट 800 से 1000 रुपये/किलोग्राम एवं प्रति अंडा 10-15 रुपये) पर बिक रहा है।

वर्तमान में कड़कनाथ मुर्गी के जीआई टैग के लिए मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के बीच बहस छिड़ी हुई है। ऐसे में जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर के शैक्षणिक कुक्कुट फार्म में इसका संरक्षण एवं संवर्धन का काम किया जा रहा है। फार्म के सह निदेशक डॉ. अनिल कुमार यादव और सहायक निदेशक डॉ. राजीव रंजन कुमार ने बताया कि कड़कनाथ के मांस में मिलेनिन नामक पिगमेंट की अधिकता से इसके मांस का रंग काला होता है।

काला मांस होने की वजह से इसे ब्लैक चिकन या कालामासी के नाम से भी जाना जाता है। कड़कनाथ पक्षी की चोंच, कलगी, पैर, पंजे, पंख इत्यादि के साथ-साथ इसका रक्त भी काले रंग का होता है। वर्तमान में पंत विवि के फार्म पर विभिन्न आयु वर्ग के लगभग डेढ़ हजार कड़कनाथ मुर्गी व मुर्गे पाले जा रहे हैं। साथ ही चूजों का उत्पादन किया जा रहा है। जो फिलहाल दिल्ली, उत्तर और उत्तराखंड में सप्लाई किया जा रहा है।

2017 में शैक्षणिक कुक्कुट फार्म पर लगभग 8 हजार से अधिक कड़कनाथ चूजों का उत्पादन किया गया। उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के किसानों को एनजीओ और पशुपालन विभाग के माध्यम से इनका वितरण किया गया था।

खुबियों से भरा है ‘कड़कनाथ’ मुर्गा

दरअसल कड़कनाथ मुर्गे में वातावरण के प्रति अनुकूलन क्षमता अच्छी होने और विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है। इसके मांस का स्वाद भी जुदा होने के चलते यह काफी लोकप्रिय हो रहा है। मुर्गियों की दूसरी नस्लों के मुकाबले कड़कनाथ मुर्गे में प्रोटीन 25% तक होता है। साथ ही इसके मांस में फैट 0.73 से 1.05% तक होता है, जबकि अन्य नस्लों में 13 से 25% तक पाया जाता है।

वसा कम होने के कारण कोलेस्ट्रॉल भी कम पाया जाता है। साथ ही इसके मांस में विभिन्न प्रकार के अमीनो एसिड अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसके साथ ही कड़कनाथ मुर्गे में विटामिन बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी व ई भी दूसरी नस्लों की मुकाबले अधिक पाए जाते हैं। कड़कनाथ मुर्गे का औसत वजन डेढ़ किलोग्राम तक होता है। डेढ़ किलो का होने में इसे औसत 5 महीने का वक्त लगता है। मुर्गी के पहली बार अंडा देने की आयु 23 से 24 सप्ताह की होती है। सालाना औसत उत्पादन 140-180 अंडे है। इसका अंडा हल्के भूरे रंग का होता है और वजन 42 से 45 ग्राम तक होता है।

दिल के लिए फायदेमंद हैं कड़कनाथ मुर्गा

साइंटिफिट रिसर्च में साबित हुआ है कि कड़कनाथ का काला मांस हार्ट अटैक रोगियों के लिए भी फायदेमंद है। दरअसल कड़कनाथ के मीट में तंत्रिका विकार से संबंधित औषधीय गुण पाए जाते हैं। यही नहीं स्थानीय जनजातियों में इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की बीमारियां दूर करने में भी किया जाता है।