इस महिला पर है देश को नाज, क्योंकि इन्होंने किया है कुछ ऐसा काम…

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इंदु मल्होत्रा देश की सबसे बड़ी अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट में वकालत करती हैं. लेकिन अब वह ऐसा नहीं करेंगी क्योंकि जिन जजो के सामने वह बहस करती थीं, अब खुद उन्हें उसी कुर्सी पर बैठना है. सुप्रीम कोर्ट में जजों को चुनने के लिए एक व्यवस्था बनाई गई है, जिस कलिजियम कहते हैं. इस कलिजियम ने इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का नया जज चुना है, जिन लोगो ने इंदु को वकील से जज बनाया है, उनमें चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेशव, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ के नाम शामिल हैं.

वकीलों के परिवार से ताल्लुक रखने वाली इंदु पहली ऐसी महिला हैं, जिन्हें वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है. वहीं इंदु सातवीं ऐसी महिला हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में जज बनने जा रही हैं.

परिवार में सब लोग वकील हैं

इंदु के पिता ओम प्राकाश मल्होत्रा भी सुप्रीम कोर्ट में वकील थे, इंदु के बड़े भाई और बहन भी वकील हैं. हमारे देश ने इंदु को तब पहचाना जब 2007 में केंद्र सरकार ने उन्हें अगस्त 2007 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर वरिष्ठ वकील नियुक्त किया था. आजादी के बाद इंदु देश की दूसरी ऐसी महिला थीं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर नियुक्त किया गया था.

उससे पहले 1977 में सरकार ने लीला सेठ को सुप्रीम कोर्ट का वकील बनाया था, जो एक चर्चित लेखक विक्रम सेठ की मां थीं. इंदु NGO Save Life Foundation की ट्रस्टी भी हैं. इसी NGO ने सुप्रीम कोर्ट में आवाज उठायी थी कि सड़क हादसे में घायल होने वालों की मदद करने वालों को परेशान न करने के लिए कानून बनाया जाए.

पहली महिला जज 1989 में सुप्रीम कोर्ट को मिली थी 

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जस्टिस फातिमा बीवी (बाएं) पहली महिला जज थीं, जबकि जस्टिस आर भानुमति फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इकलौती महिला जज हैं

जस्टिस फातिमा बीवी पहली ऐसी महिला थीं, जो सुप्रीम कोर्ट में जज बनी थीं. 1989 में उन्हें नियुक्त किया गया था. उनके बाद जस्टिस सुजाता वी मनोहर, जस्टिस रुमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं. फिलहाल जस्टिस आर भानुमति सुप्रीम कोर्ट की इकलौती महिला जज हैं. इंदु अब सातवीं महिला होंगी, जो सुप्रीम कोर्ट में जज बनेंगी.

 

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