हिन्दुस्तान के इस टॉयलेट में पढकर IIT में हो जाता है स्टूडेंट का सेलेक्शन, खबर पढकर आप भी रह जायेंगे दंग

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बिहार- 130 करोड़ की आबादी वाले भारत देश में कुछ युवा ऐसे भी हैं जो कोचिंग के टॉयलेट में पढाई करने को बेताब रहते हैं। हमारी कही इस बात पर आपका माथा जरूर ठनका होगा। दरअसल बात ही कुछ ऐसी है।

लेकिन हम आपको बता दें कि यह बात पूरे सोलह आने सच है। दरअसल बिहार के गया में एक टॉयलेट ऐसा है, जिसमें पढ़ने वाले बच्चे आईआईटी पास कर जाते हैं। यही वजह है कि टॉयलेट वाले उस एक रूम में रहकर पढ़ने के लिए छात्रों बीच होड़ मची रहती है। ऐसी मान्यता बन गई कि जो भी इसमें पढ़ेगा उसका सफल होना तय है।

IIT toilet
गरीब बच्चों को आईआईटी की निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं रिटायर्ड डीजीपी अभयानंद

तो इसलिए चहेता है यह टायलेट

गया के दुर्गाबाड़ी रोड के एक पुराने मकान में रिटायर्ड डीजीपी अभयानंद मगध सुपर 30 नाम की संस्था चलाते हैं। यहां एक समय 30 बच्चों के रहने के लिए चार रूम थे। एक रूम में टॉयलेट बना था, लेकिन किसी कारण से उसे इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। जगह की कमी के चलते कुछ छात्रों ने उसी टॉयलेट में बैठकर पढ़ना शुरू कर दिया। यहां एकांत मिलता था, जिससे बच्चे ध्यान लगाकर पढ़ पाते थे। जब एक के बाद एक टॉयलेट में पढ़ने वाले कई बच्चे सफल हुए तो ऐसी मान्यता फैल गई कि यहां पढ़ने से आईआईटी पास हो जाएंगे। आलम यह है कि अब बच्चे टॉयलेट में रहकर पढ़ने के लिए झगड़ा तक कर लेते हैं।

IIT toilet

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जगाई शिक्षा की ज्योति

सुपर 30 नाम से आईआईटी कोचिंग चलाने वाले रिटायर्ड डीजीपी अभयानंद बताते हैं कि गया अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। यहां के गरीब बच्चों के पास पढ़ने के मौके कम थे। मैंने 10 साल पहले नक्सलवाद के समस्या के हल के लिए अपनी तरह से एक छोटी सी पहल की थी। मैं चाहता था कि यहां के बच्चे पढ़ लिखकर कुछ बनें ताकि अन्य बच्चे भी उनसे प्रेरित हों। मगध सुपर 30 में प्रवेश के लिए गरीब बच्चों को इंट्रेंस टेस्ट देना होता है। जो बच्चे पास करते हैं उन्हें संस्था की ओर से रहने, खाने से लेकर पढ़ाई तक सब फ्री में दिया जाता है। मान गये डीजीपी साहब आपको, यकीनन आपकी इस कोशिश को बिग सैल्यूट तो बनता ही है।  नये भारत के निर्माण में आपका योगदान बेहद अहम  है।