देवभूमि उत्तराखंड़ में मौजूद है ऐसी गुफा जहां छुपा है दुनिया खत्म होने का रहस्य !

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पिथौरागढ़- न्यूज टुडे नेटवर्क : संसार में ऐसे बहुत से स्थान है, जो रहस्यों से भरे हुए है। इसी संबंध में भारतीय पुराणों में एक गुफा का उल्लेख किया गया है, जो उत्तराखंड में भुवनेश्वर के गंगोलीहाट गाँव में स्थित है। जिसे पाताल भुवनेश्वर गुफा के नाम से जाना जाता है । पौराणिक दृष्टि से देखा जाय, तो इस गुफा में बहुत से रहस्य छिपे हुए है। माना जाता है की इस गुफा में दुनिया के अंत का भी राज छुपा है, जिसे भगवान शिव का निवास स्थान भी कहा गया है। आइये जानते है, इस गुफा का वह कौन सा रहस्य है? जिसके अनुसार इस दुनिया का अंत हो जाएगा.एक ऐसी गुफा जिसमें छुपा है दुनिया का अंत।

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गुफा मंदिर में दिखता है ब्रह्मांड का विंहगम दृश्य

यहां पर आप चारों युग, तमाम देवी-देवता और पूरे ब्रह्मांड का विहंगम दृश्य देख सकते हैं। स्कंद पुराण के 103वें अध्याय में भी पाताल भुवनेश्वर का वर्णन किया गया है और इसे भूतल का सबसे पावन क्षेत्र बताया गया है। इसी अध्याय में कहा गया है कि पाताल भुवनेश्वर में पूजन करने से अश्वमेध से हजार गुणा फल प्राप्त होता है।

किवदंतियों के अनुसार

गुफा में कई प्राचीन आकृतियां हैं जिन्हें श्रद्धालु पौराणिक घटनाओं के साथ जोड़ते हैं। कहा जाता है कि यहां पर पांडवों ने तपस्या की थी। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान भोलेनाथ यहां निवास करते हैं व देवी-देवता उनके दर्शन-पूजन के लिए यहीं पर आते हैं। गुफा में चित्रित हंस को ब्रह्मा जी के हंस से जोड़ा जाता है। जनमेजय के नागयज्ञ के हवन कुंड को भी यहीं बताया जाता है। कहा जाता है अपने पिता परीक्षित को श्रापमुक्त करने के लिए जनमेजय ने सारे नाग मार डाले लेकिन तक्षक नामक नाग बच निकला जिसने बदला लेते हुए परीक्षित को मौत के घाट उतारा। नागयज्ञ के कुंड के ऊपर इसी नाग का चित्र है।

patal bhuvaneswar

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प्रलय का राजदार है यह गुफा मंदिर

यह गुफा प्राकृतिक रूप से पत्थरों द्वारा बनी हुई है, जिसके अंदर हमेशा पानी रिसता रहता है। कहा जाता है कि इस गुफा में दुनिया की प्रलय का राज छिपा है। दरअसल यहां चार प्रस्तर खंड हैं जो चार युगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें तीन एक समान हैं जबकि अंतिम बड़ा है जिसे कलयुग का प्रतीक माना जाता है। इसी के ऊपर एक पिंड लटक रहा है। कहा जाता है कि हर 7 करोड़ वर्ष में इस पिंड के आकार में एक इंच की वृद्धि होती है जिस दिन यह पिंड इस प्रस्तर को छू लेगा उसी दिन प्रलय आ जाएगी।

आदि शंकराचार्य ने खोजी थी यह गुफा

इस गुफा मंदिर की खोज के बारे में कहा जाता है कि युग रुपांतर के बाद काफी समय तो इस गुफा के बारे में किसी को जानकारी नहीं थी आदि शंकराचार्य ने इस गुफा की खोज की थी। गुफा मंदिर होने के कारण ही इस क्षेत्र को गुफाओं का देव कहा गया है।