यहां शादी से पहले दूल्हे को पीना पड़ता है जानवरों का खून, जानिए क्यों?

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : हमारे देश में कई अजीबोगरीब परंपराएं हैं। कई लोग आज भी अंधविश्वास में जीते हैं। शादी एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जो सभी रिश्तों से अनमोल होता है। पति-पत्नि का ये रिश्ता सभी रिश्तों से खास होता है। जब लडक़े और लडक़ी की शादी होती है तो कई रस्मों और रिती रिवाजों से की जाती है सभी धर्मों में अलग-अलग रिती रिवाज होते हैं, लेकिन आज हम आपको ऐसी शादी के बारे में बताएंगे जो कि आम शादियों से अलग है। हर देश में शादी से जुड़े अनेकों रीति-रिवाज होते हैं, जिसे पूरी मान्यता और परंपरा के साथ मनाया जाता है. हालांकि, किसी दूसरी जनजाति और धर्म के लिए किसी अन्य जाति के रिवाज देखने-सुनने में अजीबों-गरीब हो सकते हैं। जी हां, आज हम आपको भारत के मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ के आदिवासी इलाके में रहने वाली ऐसी ही एक आदिवासी जनजाति के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां शादी से पहले ये काम किया जाता है।

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जहां दूल्हा पीता है जानवरों का खून

गोंड़ जाति में शादी को तभी माना जाता है जब दूल्हा जानवर को मारकर उसका खून पिए। इस रस्म के बाद ही शादी को पूरा माना जाता है। यह रिवाज तो सुनने में ही बड़ा अजीब लग रहा है। इस जनजाति के लोग आज भी पुराने नियम कायदे का पालन करते है।

बारात के साथ जिंदा सुअर में लाते हैं साथ

यहां शादी के समय दूल्हा और दुल्हन का विवाह तभी माना जाता है जब दूल्हा एक जानवर को मारकर उसका खून पिए। रस्मों के अनुसार, दूल्हा जब बरात लेकर आता है तो उसको अपने साथ जिंदा सुअर लेकर जाना पड़ता है और जब आखिरी रस्म हो जाती है तो सूअर को मारकर दूल्हे को उसका खून पीना पड़ता है। अगर वह इस रस्म को निभाने से इंकार करता है तो यह विवाह संपन्न नहीं माना जाता।

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अगर ऐसा नहीं करेंगे तो विवाह को मान्यता नहीं मिलेगी

अब तो आप भी ये सोच रहे होंगे की कोई कैसे ये सब कर सकता है लेकिन कोई क्या करे जब इनके रिती रिवाजों में ही ऐसा है, अगर यह ऐसा नहीं करेंगे तो विवाह की कोई मान्यता नहीं होगी। आपको बता दें कि भारत में कई ऐसी जगहे है जहां शादियों के रिती रिवाज कुछ अटपटे से होते है, लेकिन फिर भी उनको इन रिवाजों को करना होता है।