जानिए! मुस्लिम धर्म में रमजान के महीने में क्यों रखे जाते है रोजे

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नई दिल्ली- न्यूज टुडे नेटवर्क : पाक-साफ महीने ‘रमजान’ की शुरूआत होने वाली है, इस्लामिक कैलेंडर का यह महीना त्याग, सेवा, समर्पण और भक्ति का मानक है। पूरे एक महीने तक इस्लाम में विश्वास रखने वाले लोग रोजा रखेंगे। मुस्लिम धर्म के कई कठोर नियम होते है। इस्लाम धर्म में रोजे का बहुत महत्व होता है। अल्लाह के प्रति गहरी आस्था रखने के रूप में रोजे रखे जाते है। इस्लाम धर्म में नए चांद के साथ अगले 30 दिनों तक नए चांद के साथ ही रोजेे खत्म होते हैं। रमजान के दौरान कई प्रकार के व्यसनों से भी दूरी रखी जाती है।

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क्यों रखे जाते है रोजे

कुरान के अनुसार, अल्लाह ने अपने दूत के रूप में पैगम्बर साहब को चुना तथा रमज़ान के दौरान ही उनको कुरान के बारे में पता चला था। रमज़ान के आखिरी 10 दिनों का सबसे ज्यादा महत्व होता हैं क्योंकि इन्हीं दिनों में कुरान पूरी हुई थी।

क्या है मान्यता

जब पैगम्बर मोहम्मद को ज्ञान प्राप्त हुआ तो वह एक संत के रूप में पैदा हुए थे पर तब भीषण हिंसा का दौर चल रहा था। उनके अपनों ने ही उनका अनादर किया था और इन सबसे निराश होकर पैगम्बर मोहम्मद ने एकांत में रखने के लिये जंगल में चले गए।

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सच्चे ज्ञान की प्राप्ति

माउंट हिजरा में उन्होने दिन और रात बिताई और अल्लाह का सच्चा ज्ञान प्राप्त किया। यही कारण है कि एक महीने के दौरान सभी लोग बुरी आदतों से दूर रहने का प्रयास करते हैं। यही से रोजा में 30 दिनों तक रोजा रखने का चलन प्रारंभ हुआ।

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रमजान से जुड़ी मान्यताएं

  • माना जाता है कि रमजान के पाक महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। इस माह में किए गए अच्छे कर्मों का फल कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। और खुदा अपने बंदों के अच्छे कामों पर नजर रखता है, उनसे खुश होता है।
    कहते हैं कि रमजान के पाक महीने में दोजख यानी नर्क के दवाजे बंद कर दिये जाते हैं।
  • माहे रमजान में नफिल नमाजों का सवाब फर्ज के बराबर माना जाता है। पाक रमजान महीने में फर्ज नमाजों का सवाब 70 गुणा बढ़ जाता है।
  • रमजान में रोजा रखा जाता है। रोजेदार भूखे-प्यासे रहकर ख्ुादा की इबादत करते हैं। वे सिर्फ सहरी और इफ्तार ही लेते हैं। रोजेदार को झूठ बोलना, चुगली करना, गाली-गलौज करना, औरत को बुरी नजर से देखना, खाने को लालच भरी नजरों से देखना मना होता है।
  • रमजान के पाक महीने में अल्लाह से अपने सभी बुरे कर्मों के लिए माफी भी मांगी जाती है।
  • महीने भर तौबा के साथ इबादतें की जाती हैं। ऐसा करने से इंसान के सारे गुनाह माफ हो जाते हैं।