दोनों पैर नहीं फिर भी चढ़ना चाहता है एवरेस्ट, घर गिरवी रखवा कर रहा मेहनत…

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कहते हैं न अगर हौसले बुलंद हो तो कोई भी मुश्किल उन हौसलों को मिटा नहीं सकती. इस कहावत को सच किया हरी बुद्धा मागर ने. इनकी कहानी सुनकर आपके भी आंखो में आंसू आ जाएंगे. 38 साल के नेपाली नागरिक हरी बुद्धा मागर ब्रिटिश गुरखा रहे हैं और इंग्लैंड में ही सेटल हो गए हैं.

उन्होंने 7 साल पहले अपने दोनों पैर अफगानिस्तान में हुए ब्लास्ट में खो दिए. लेकिन अब वे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं. आइए बताते हैं आपको पूरी कहानी…

हरी का सपना था कि वह एक दिन एवरेस्ट चढ़ेगा और अपना सपना पूरा करने के लिए हरी ने अपना घर भी गिरवी रखवा दिया. इससे उनको करीब 2.2 करोड़ रूपए मिले जिसका खर्च वे पहाड़ पर चढ़ने के लिए करना चाहते हैं.

हरी एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए नेपाल के थोरंग ला पास से ट्रेनिंग ले रहे हैं. हालांकि, नेपाल की सरकार ने पिछले हफ्ते विकलांग लोगों के पहाड़ की चढ़ाई करने पर बैन लगाकर उनकी चाहत पर रोड़े लगा दिए. सरकार ने ये फैसला विकलांगों की सुरक्षा को लेकर किया. पिछले कुछ सालों में एवरेस्ट पर चढ़ाई की कोशिश करने वाले विकलांगों में 29 की मौत हो गई है.

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वे इसके लिए हरसंभव कोशिश करना चाहते हैं. उनका कहना है कि वह काठमांडू जाकर इस बारे में सरकार से बात करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा- ‘मैं ये सब ना अपने लिए कर रहा हूं, ना विकलांगों के लिए. मैं ये सब हर उस व्यक्ति के लिए कर रहा हूं जो अपने सपनों को पूरा करने की चाहत रखते हैं.