दोस्त के लिए जब मसीहा बन गए हरभजन, जिसने सुना हो गया भज्जी का “फैन”

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नई दिल्ली- न्यूज टुडे नेटवर्क: आज के वक्त में बढती प्रतिस्पर्धा ने रिश्तों की दुनिया को भी प्रभावित किया है। लेकिन सच्चे और अच्छे लोगों की बदौलत आज भी रिश्तों के बीच वही गर्माहट का दौर जारी है। ऐसी ही दोस्ती का रिश्ता निभाकर इन दिनों हरभजन सिंह पूरे क्रिकेट जगत में चर्चाओं में आ गए हैं। भले ही लंबे समय हरभजन टीम इंडिया में नही हों लेकिन आईपीएल में उन्होंने सबको खूब इंटरटेन किया। बहुत कम लोग जानते हैं कि हरभजन ने अपने एक साथी क्रिकेटर की भी मदद की जो अपनी जिंदगी से लड़ रहा था।

हरभजन सिंह

दोस्त के लिए मसीहा बन गये हरभजन पाजी

भज्जी के साथ 1990 में पंजाब के लिए अंडर 16 क्रिकेट खेलने वाले क्रिकेटर हरमन हैरी हाल ही में अपनी आंतों में ‘परफोरेशन पेरिटॉनिटिस और एनट्रो्क्यूटेनियस फिश्चुला’ (फिश्चुला) के हो जाने से अपनी जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे थे।

दरअसल 1990 के बाद हरभजन तो टीम इंडिया में जगह पाने में सफल रहे लेकिन हैरी का करियर उड़ान नहीं भर सका। लेकिन एक दिन हैरी ने मदद की उम्मीद में भज्जी को फोन लगा दिया। भज्जी ने फौरन ही उसकी मदद करने का फैसला कर लिया।

एक इंटरव्यू में भज्जी ने बताया कि उसने किसी तरह से मुझसे संपर्क किया और अपनी तकलीफदायक बीमारी के बारे में मुझे बताया। उसे पैसों की सख्त जरूरत थी। मैने उससे कहा कि वह बेझिझक ऑपरेशन करा ले और वादा किया कि मैं सारे जरूरी खर्च देख लूंगा। एक मानव जीवन से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। उन्होंने कहा कि मैने उससे कहा कि वह पैसे को भूल जाए और अपना अच्छे अस्पताल में किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाकर ऑपरेशन कराए।

हरमन हैरी

बोले हरमन- जिंदगी भर रहूंगा भज्जी का कर्जदार

हरभजन सिंह की मदद से हरमन हैरी का नांग्लोई स्थित राठी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ। उनका ऑपरेशन करने वाले डॉ राठी ने कहा कि उनकी हालत काफी खराब होती जा रही थी और उन्हें तुरंत ही ऑपरेशन की जरूरत थी।

दरअसल परफोरेशन पेरिटॉनिटिस और एनट्रो्क्यूटेनियस फिश्चुला की बीमारी में आंतों या पेट और चमड़ी के बीच असामान्य कनेक्शन विकसित हो जाता है जिसकी वजह से आंतो में से चीजें त्वचा के माध्यम से बाहर आने लगती हैं। बताया जा रहा है कि भज्जी ने पूरे इलाज में करीब ढाई लाख रुपये खर्च किए ।

अपने सफल आपरेशन के बाद हरमन ने कहा कि मैं जीवन भर हरभजन कर्जदार रहूंगा। उसने साबित किया है कि सच्ची दोस्ती क्या होती है। पिछले साल ही इलाज पर अपनी पूरी बचत खर्च करने के बाद मेरे पास बिलकुल भी पैसा नहीं बचा था। हरभजन एक मसीहा की तरह आया और मुझे मौत के मुंह से निकाल लिया।