उत्तराखंड़ के वरिष्ठ IPS ने जलसंरक्षण की दिशा में शुरू की अनूठी मुहीम, निभाई सामाजिक जिम्मेदारी

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हल्द्वानी- न्यूज टुडे नेटवर्क: संजय पाठक- एक बार फिर गर्मियों की दस्तक के साथ पानी के लिए हाहाकार मचना शुरू हो गया है। उत्तराखंड़ के मैदानी जिलों के साथ ही पहाड़ी जनपदों में भी पीने के पानी की एक-एक बूंद के लिए पसीना बहाते लोगों को देखा जा सकता है। दिनों दिन बढते जलसंकट की यह तस्वीर वाकई डराने वाली है। लेकिन जल संकट के घनघोर अंधेरे के बीच समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो जल संरक्षण की दिशा में भागीरथ प्रयास कर दीपक जलाने का काम कर रहे हैं।

Underground water conservation
भूमिगत जल संरक्षण के लिए आईजी पूरन सिंह रावत ने पेश की अनूठी मिसाल

उन्हीं में से एक हैं कुमाऊं के पुलिस महानिरीक्षक पूरन सिंह रावत, जी हाँ, पुलिस के इतने बड़े पद पर रहते हुए आईजी पूरन सिंह रावत कई वर्षों से भूमिगत जल संरक्षण की अनूठी मुहीम चला रहे हैं। इसके लिए आज दिन तक उन्होंने अपने सरकारी आवासों में वाटर रिचार्ज टेंकों का निर्माण करवाया है, ताकि भूमिगत वाटर लेबल में इजाफा हो सके। आईजी पूरन सिंह रावत की भूमिगत जल संरक्षण की यह मुहीम नैनीताल, पिथौरागढ ट्रेनिंग सेंटर और हल्द्वानी के सरकारी आवासों में चल रही है। वहीं पुलिस महानिरीक्षक की यह अनूठी कयावद समाज में हर आमोखास के लिए प्रेरणास्त्रोत भी बनी हुई है।

पेड़-पौधों के जरिये भी करते हैं जल संरक्षण

यह तो आप जानते ही होंगे कि जमीन पर जितने अधिक पेड़-पौधें होंगे, जल संरक्षण उतना ही अधिक होगा। पेड़ों के कारण एक ओर जहाँ जमीन पर सीधे धूप ना पड़ने से जलस्तर में गिरावट नही आती वहीं हरियाली के साथ ही आक्सीजन का लेबल भी बेहतर बना रहता है। यही वजह है कि आईजी पूरन सिंह रावत भी लम्बे समय से अपने सरकारी आवासों में पेड़-पौधों का खास तौर पर ध्यान रखते हैं।

Underground water conservation
हल्द्वानी सरकारी आवास में बने भूमिगत वाटर टैंक के पास आईजी पूरन सिंह रावत

यही नही अपने मित्रों और विभागीय अधिकारियों को भी वह इस बात के लिए प्रेरित भी करते हैं। आईजी पूरन सिंह रावत कहते हैं कि समाज में एक-दूसरे का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में पानी बचाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग,रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे उपायों को जानते तो सब हैं लेकिन इस दिशा में कदम उठाने भी होंगे। ताकि दिनों दिन बढती जल संकट की मुसीबत को टाला जा सके।

आईजी साहब की अपील

भूमिगत जल संरक्षण की इस मुहीम को आईजी पूरन सिंह रावत ने अपने स्तर तक ही सीमित नही रखा है। इसके लिए अब आईजी साहब शहर के तमाम बैकेंट हॉल स्वामियों के साथ ही सेना और एफटीआई के ग्राउंड्स में भी यह मुहीम शुरू करना चाहते हैं। इसके लिए बहुत जल्द आईजी पूरन सिंह रावत हल्द्वानी के बैंकेट हॉल स्वामियों के साथ मीटिंग भी करने वाले हैं।

आईजी पूरन सिंह रावत कहते हैं कि बैंकेट हॉल में पानी की खपत ज्यादा होती है, इसके साथ ही वहाँ खाली जमीन भी होती है , ऐसे में भूमिगत वाटर टैंक आसानी से बनाए जा सकते हैं। अगर शहर के तमाम बैंकेट हॉलों के साथ ही खाली पड़े सरकारी ग्राउंड्स में वाटर रिचार्ज टेंक बनेंगे तो इससे भूमिगत वॉटर लेबल के बढने में मदद मिलेगी। जल संरक्षण की यह मुहीम आम जनता को भी पानी बचाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित भी करेगी, क्योंकि जल संकट की दुश्वारियों से आमजनता भी दो-चार होती है।

बता दें कि वर्ष 1997 में देश में जलस्तर 550 क्यूबिक किलोमीटर था। लेकिन ताजा अनुमान के मुताबिक, सन 2020 तक भारत में यह जलस्तर गिरकर 360 क्यूबिक किलोमीटर रह जाएगा। ट्यूबवैल, बोरवेल द्वारा भूमिगत जल के अनियंत्रित उपयोग ने भी जमीन के जलस्तर को कम करने का काम किया है। ऐसे में जल संरक्षण और उसके जरिए भूमिगत जलस्तर को रिचार्ज करने की दिशा में आईजी पूरन सिंह रावत की यह मुहिम वाकई समाजसेवा का अनूठा उदाहरण है, जो समाज में हर किसी को जल संरक्षण के लिए प्रेरित भी कर रहा है।