हल्द्वानी- अब सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी बेधड़क कर सकेंगे अपने “मन की बात”, जानें कैसे

525
Facebooktwittergoogle_pluspinterest

हल्द्वानी- न्यूज टुडे नेटवर्क: हल्द्वानी में पहली बार आम्रपाली ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट एंव कार्डियल आयोजित द्वारा हल्द्वानी लिटरेचर फेस्ट में देशभर के साहित्य से जुडे चर्चित हस्तियों का जमवाडा लगा । देश के जाने माने लेखकों व साहित्यकारों से रूबरू हुवे हल्द्वानी लिटरेचर फेस्ट के पहले सत्र में शासकीय कार्य और साहित्य लेखन पर परिचर्चा आयोजित की गई। जिसमें “स्याह, सफेद और स्लेटी भी” पुस्तक के लेखक आईएएस रणवीर सिंह चौहान, “पहला दखल”, पुस्तक के लेखक कुमाऊं विजिलेंस एसपी अमित श्रीवास्तव और “खड़कमाफी की स्मृतियों से” पुस्तक लिख चुके संभागीय खाद्य नियंत्रक कुमाऊं संभाग ललित मोहन रयाल  की पुस्तकों पर सार्थक परिचर्चा हुई । परिचर्चा के दौरान सरकारी कर्मचारियों के व्यावसायिक लेखन और साहित्य प्रतिभा को आगे लाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

आचरण नियमावली के तहत करें काम , होगा लिखना आसान

लिटरेचर फेस्ट के पहले सत्र में सरकारी अधिकारियों के लेखक अवतार ने मौजूद दर्शकों को चौंका दिया। परिचर्चा के दौरान वरिष्ठ आईएएस रणवीर सिंह चौहान ने कहा कि सरकारी कामकाज के दौरान योजनाओं के क्रियान्यवयन को लेकर विचार और जनसंवाद बेहद अहम रोल अदा करते हैं।

हल्द्वानी लिटरेचर फेस्ट में एसपी विजिलेंस अमित श्रीवास्तव, आईएएस रणवीर सिंह चौहान और संभागीय खाद्य नियंत्रक कुमाऊं संभाग ललित मोहन रयाल

ऐसे में कई बार सरकारी कर्मचारी अपने मन की बात को पुस्तक के जरिये भी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। प्रशासनिक सुधार आयोग और आचरण नियमावली की धारा 13 का इस्तेमाल करके सरकारी अधिकारी और कर्मचारी बेधड़क अपनी साहित्यिक प्रतिभा को हुनर समाज के सामने पेश कर सकते हैं।

बता दें कि 2009 बैच के आईएएस रणवीर सिंह चौहान मिर्ज़ा ग़ालिब पर शोध करते हुए मिर्ज़ा ग़ालिब को डेढ़ सौ पन्नों का खत भी लिखा है। उनकी ख़ास बात यह है कि जितनी बेहतरीन नज़्में वह हिंदी में लिखते हैं उतनी ही उम्दा शायरी और कहानियां उर्दू ज़बान में कहते हैं। कुछ इसी तरह साहित्यिक प्रतिभा के धनी एसपी विजिलेंस अमित श्रीवास्तव और संभागीय खाद्य नियंत्रक कुमाऊं  ललित मोहन रयाल भी हैं।