महाश्वेता देवी : दलितों के हक के लिए लड़ने वाली लेखिका को गूगल ने डूडल बनाकर दिया सम्मान…

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गूगल ने आज भारत की प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका महाश्वेता देवी के 92 वें जन्मदिन पर डूडल बनाकर उन्हें याद किया है. उन्होंने बांग्ला भाषा में बेहद संवेदनशील तथा वैचारिक लेखन के माध्यम से उपन्यास तथा कहानियों से साहित्य को समृद्धशाली बनाया. अपने लेखन कार्य के साथ-साथ महाश्वेता देवी ने समाज सेवा में भी सदैव सक्रियता से भाग लिया और इसमें पूरे मन से लगी रहीं. स्त्री अधिकारों, दलितों तथा आदिवासियों के हितों के लिए उन्होंने जूझते हुए व्यवस्था से संघर्ष किया तथा इनके लिए सुविधा तथा न्याय का रास्ता बनाती रहीं.

महाश्वेता देवी का जन्म 14 जनवरी 1926 में डेक्का में हुआ था. उनका पहला उपन्यास झांसी की रानी पर था जोकि 1956 में प्रकाशित हुआ था. उनके मशहूर कामों में हजार चुरासिर मां, अरण्येर, अधिकार, अग्निगरबा, रुदाली, सिद्धु कन्हुर डाके शामिल हैं.

Mahasweta

इसके अलावा उन्होंने बिहार के ग्रामीण लोगों की उदासीनता की तरफ भी ध्यान दिलाने की कोशिश की थी. उन्होंने सिंगुर और नंदीग्राम में जबरन हुए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आवाज उठाई थी. उन्होंने एक बार कहा था कि मेरा भारत आज भी अंधेरे के पर्दे के पीछे बसता है.