बजट 2018: जानें वित्तमंत्री अरूण जेटली का राजनीतिक सफरनामा

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अरूण जेटली भारतीय जनता पार्टी के उन शीर्षस्थ नेताओं में से एक हैं जिनकी भूमिका बतौर रणनीतिकार और थिंक टैंक के रूप में बेहद अहम है। अरूण जेटली के सियासी कद को इस बात से समझा जा सकता है कि 2014 में हुए लोक सभा चुनाव में अमृतसर से हार के बावजूद अरूण जेटली को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वित्त और रक्षा जैसे दो महत्वपूर्ण मंत्रालयों की बागडोर दी। वर्तमान में बतौर वित्तमंत्री अरूण जेटली राज्य सभा में भाजपा के सांसद और विपक्ष के नेता हैं।

अरूण जेटली का जन्म और परिवार

अधिवक्ता पिता महाराज किशन जेटली तथा माता रतन प्रभा जेटली के पुत्र अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर, 1952 को नयी दिल्ली में हुआ था। 28 दिसम्बर, 1952, नई दिल्ली महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली के घर अरूण जेटली का जन्म हुआ। अरूण जेटली ने अपनी विद्यालयी शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, नई दिल्ली से 1957-69 में पूर्ण की। उन्होंने 1973 में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, नई दिल्ली से कॉमर्स में स्नातक की। 1977 में दिल्ली विश्‍वविद्यालय के विधि संकाय से विधि की डिग्री प्राप्त की। छात्र के रूप में अपने कैरियर के दौरान, उन्होंने अकादमिक और पाठ्यक्रम के अतिरिक्त गतिविधियों दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के विभिन्न सम्मानों को प्राप्त किया है। अरूण जेटली 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष भी रहे। अरूण जेटली ने 24 मई 1982 को संगीता जेटली से विवाह कर लिया। उनके दो बच्चे, पुत्र रोहन और पुत्री सोनाली हैं।

 जेपी आन्दोलन , बीजेपी और अरूण जेटली 

सन 1973 से भ्रष्टाचार के विरुद्ध आहूत लोकनायक जय प्रकाश नारायण के ‘संपूर्ण क्रांति आंदोलन’ के सिलसिले में विद्यार्थी और युवा संगठनों की जेपी द्वारा स्वयं गठित की गई ‘राष्ट्रीय समिति’ के अरूण जेटली संयोजक रहे।1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अघ्यक्ष के तौर पर शुरूवात करने के बाद 1975-77 में 19 महीनों तक आपातकाल के दौरान मीसा में बंदी रहने के बाद अरूण जेटली जनसंघ में शामिल हो गए।

एक वरिष्ट अधिवक्ता होने के नाते 1977 से उच्चतम न्यायालय तथा देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में आपने वकालत की। 1989 में वी. पी. सिंह सरकार द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किए गए। इस दौरान अरूण जेटली ने बोफोर्स घोटाला कांड की जांच की। भारतीय ब्रिटिश विधिक न्यायालय के समक्ष आपने भारत में भ्रष्टाचार और अपराध’ विषयक दस्तावेज प्रस्तुत किए। जून, 1998 में नशीले द्रव्यों और अनियमित धनराशि की आबा-जाही पर रोक लगाने संबंधी अंतर राष्ट्रीय कानून को अधिनियमित करने के उद्देश्य से आयोजित संयुक्त राष्ट संघ सम्मेलन’ में अरूण जेटली भारत सरकार के अधिकृत प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए थे।

2002 में 84 वें और 2004 में 91वें संशोधन विधेयक अरूण जेटली के द्वारा प्रस्तुत किये गये। शरद यादव, माधव राव सिंधिया, लाल कृष्ण आडवाणी ,फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा और बिड़ला परिवार समेत कई राजनेताओं को दोषमुक्त करवाने हेतु अरूण जेटली ने अदालती लड़ाई लड़ी। अरूण जेटली अपने जीवन में अब तक कई विधिक और समसामयिक समस्याओं पर सारगर्भित पुस्तकों को भी लिख चुके हैं। बात अगर अरूण जेटली के शौक की करें तो उन्हें क्रिकेट बहुत पसंद है यही वजह है कि दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डी.डी.सी.ए.) में बतौर अघ्यक्ष उनकी लंबी पारी रही।

 भारतीय जनता पार्टी के कुशल रणनीतिकार हैं जेटली 

विद्यार्थी जीवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता रहे अरुण जेटली 1999 आम चुनाव के पूर्व भाजपा के प्रवक्ता हो गए। अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए गठबंधन सरकार में अरूण जेटली 13 अक्तूबर, 1999 को ‘सूचना और प्रसारण’ तथा नवगठित ‘विनिवेश ’ मंत्रालयों के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाए गए। 23 जुलाई 2000 को राम जेठमलानी के पदत्याग के कारण अरूण जेटली को विधि, न्याय और समवाय कंपनी मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौपा गया। नवंबर, 2000 में अरूण जेटली विधि, न्याय, समवाय और नौवहन मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री बनाए गए।

जुझारू, ऊर्जावान संगठनकर्ता और सक्षम रणनीतिकार के रूप में अरूण जेटली की भूमिका को भारतीय जनता पार्टी आलाकमान ने भी समझा और 1 जुलाई, 2002 को केंद्रीय मंत्री का पद त्याग कर अरूण जेटली को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता बनाया गया। सभी चुनावों, उपचुनावों में भाजपा के विजय अभियानों और पार्टी के रणनीतिकार के रूप में अपनी नीतिकुशलता का परिचय देते हुए अरूण जेटली ने बीजेपी में अपनी एक खास जगह बनाई है।

कैसे हुई अरूण जेटली की राजनीति में शुरूवात

1991 से जेटली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं। 1999 के आम चुनाव से पहले की अवधि के दौरान वह भाजपा के प्रवक्ता बने। 1999 में भाजपा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की वाजपेयी सरकार के बाद सत्ता में आने के बाद उन्हें 13 अक्टूबर 1999 को सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किया गया था। उन्हें निर्गुण राज्य (स्वतंत्र प्रभार) , एक नया मंत्रालय विश्व व्यापार संगठन के शासन के तहत विनिवेश की नीति को प्रभावित करने के लिए पहली बार बनाया गया था। उन्होंने कानून, न्याय और कंपनी मामलों के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद 23 जुलाई 2000 को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला।

सन् 1973 से भ्रष्टाचार के विरुद्ध आहूत लोकनायक जय प्रकाश नारायण के ‘संपूर्ण क्रांति आंदोलन’ के सिलसिले में विद्यार्थी और युवा संगठनों की जेपी द्वारा स्वयं गठित की गई ‘राष्ट्रीय समिति’ के आप संयोजक थे. सन् 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छांत्रसंघ के अघ्यक्ष थे। 1975-77 में 19 महीनों तक आपातकाल के दौरान मीसा में बंदी रहने के बाद आप जनसंघ में शामिल हो गए।

एक वरिष्ट अधिवक्ता होने के नाते 1977 से उच्चतम न्यायालय तथा देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में आपने वकालत की. सन् 1989 में वी. पी. सिंह सरकार द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किए गए. इस दौरान आपने बोफोर्स घोटाला कांड के जांच की तफसील तैयार की.

भारतीय ब्रिटिश विधिक न्यायालय के समक्ष आपने भारत में भ्रष्टाचार और अपराध’ विषयक दस्तावेज प्रस्तुत किए। जून, 1998 में नशीले द्रव्यों और अनियमित धनराशि की आबा-जाही पर रोक लगाने संबंधी अंतर राष्ट्रीय कानून को अधिनियमित करने के उद्देश्य से आयोजित संयुक्त राष्ट संघ सम्मेलन’ में आप भारत सरकार के अधिकृत प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए थे।  सन् 2002 में 84 वें और 2004 में 91वें संशोधन विधेयक भी अरूण जेटली द्वारा प्रस्तुत किये गये। शरद यादव, माधव राव सिंधिया , लाल कृष्ण आडवाणी ,फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा और बिड़ला परिवार समेत कई दिग्गज राजनेताओं को दोषमुक्त करवाने हेतु  अरूण जेटली मुकदमे लड़ चुके हैं।

 अरूण जेटली का कानूनी सफरनामा

जेटली भारत के सुप्रीम कोर्ट और 1977 से देश में कई उच्च न्यायालयों के सामने कानून का अभ्यास कर रहे हैं। जनवरी 1 990 में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया। 1989 में वी.पी. सिंह सरकार ने उन्हें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया था और बोफोर्स घोटाले में जांच के लिए कागजी कार्रवाई की थी। उनके ग्राहक जनता दल के शरद यादव से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के माधवराव सिंधिया से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एल। के आडवाणी के लिए राजनीतिक स्पेक्ट्रम को शामिल करते हैं।

उन्होंने कानूनी और मौजूदा मामलों पर कई प्रकाशनों की रचना की है। उन्होंने भारत-ब्रिटिश कानूनी फोरम से पहले भारत में भ्रष्टाचार और अपराध से संबंधित कानून पर एक पत्र प्रस्तुत किया है। वह भारत सरकार की ओर से जून 1 99 8 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के लिए एक प्रतिनिधि था जहां ड्रग्स एंड मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित कानूनों की घोषणा को मंजूरी दे दी गई थी।

जेटली भी विशाल बहुराष्ट्रीय निगमों की ओर से पेप्सिको और कोका कोला और भारत के अन्य कई मामलों में भी सामने आए हैं। कानून मंत्री, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री होने के बाद जेटली ने एक मामले में 2002 में पेप्सी का प्रतिनिधित्व किया था, जहां भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने मनाली-रोहतांग रोड पर पारिस्थितिक रूप से नाजुक चट्टानों पर विज्ञापनों की पेंटिंग के लिए 8 कंपनियों पर कठोर जुर्माना लगाया था। कंपनियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था कि क्यों पर्यावरण बर्बरता में शामिल होने के लिए उन पर अनुकरणीय क्षति नहीं लगाई जानी चाहिए।

भारतीय राजनीति में अरूण जेटली सफरनामा

1980-1990 – अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, भारत सरकार

13 अक्तूबर, 1999 – सूचना और प्रसारण मंत्रालय के राज्य मंत्री

30 सितम्बर, 2000 – स्वंतत्र प्रभार

10 दिसम्बर, 1999-जुलाई 2000 – विनिवेश (अतिरिक्त प्रभार) के राज्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार)

अप्रैल, 2000 – राज्य सभा के लिये निर्वाचित हुए

23 जुलाई, 2000 – विधि, न्याय और कंपनी कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री रहे

6 नवम्बर, 2000 – राज्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार)

7 नवम्बर, 2000 – विधि, न्याय और कंपनी कार्य मंत्री

1 जुलाई, 2002-20 मार्च, 2001 – नौवहन मंत्री (अतिरिक्त प्रभार)

1 सितम्बर, 2001-29 जुलाई, 2002 – सदस्य, दिल्ली विश्वविद्यालय की कोर्ट

29 जनवरी, 2003 – सदस्य, गृह कार्य संबंधी समिति सदस्य, विदेशी मामलों संबंधी समिति

29 जनवरी, 2003 से विधि और न्याय मंत्री तथा वाणिज्य और 21 मई, 2004 उद्योग मंत्री

अगस्त, 2004 से सदस्य, वाणिज्य संबंधी समिति सदस्य, विशेषाधिकार समिति

अक्तूबर, 2004 से सदस्य, गृह मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति

जनवरी, 2006 से सदस्य, भारतीय विश्व कार्य परिषद

अप्रैल 2006 – राज्य सभा के लिए पुनर्निर्वाचित हुए

अगस्त, 2006 से सदस्य, लाभ के पद से संबंधित संवैधानिक और क़ानूनी स्थिति की जांच करने संबंधी संयुक्त समिति के सदस्य बने। 3 जून, 2009 से राज्य सभा में विपक्ष के नेता बने।