जिन्ना मामले में दरगाह से हुआ फतवा जारी, मुसलमानों को लेकर लिखी ये बड़ी बात

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बरेली- न्यूज टुडे नेटवर्क : पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर का मामला इन दिनों तूल पकड़े हुए है। मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का है। जिन्ना विवाद अब बरेली पहुंच गया है। बरेलवी मसलक की सबसे बड़ी दरगाह आला हजरत से जिन्ना के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। फतवा में कहा गया है कि जिन्ना मुल्क के बंटवारे के जिम्मेदार हैं। उसके समर्थन में खड़ा होना जायज नहीं है। फतवा में कहा गया है कि देश में जिन्ना की जहां भी तस्वीरे लगी हैं सभी को उतार देना चाहिए।

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जिन्ना का समर्थन न करें भारतीय मुसलमान : मौलाना

जारी हुए फतवे में भारत में रहने वाले मुस्लमानों से अपील की गई है कि वो जिन्ना के मामले में समर्थन न करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिन्ना के चित्र को भी हटा देना चाहिए। इस मामले को लेकर एक मौलाना का कहना है कि जिस व्यक्ति ने मुल्क को बांटने का काम किया हो उनके हिमायत में खड़ा होना ठीक नहीं है।

क्या कहा दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता ने ?

  • दरगाह के प्रवक्ता मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि दरगाह आला हजरत से जिन्ना के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि जिन्ना देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार हैं।
  • मुसलमानों को जिन्ना के समर्थन में खड़े होना जायज नहीं है। जिन्ना दुश्मन देश का हिस्सा हैं। वह हमारे देश का हिस्सा नहीं है। ऐसे में उनकी जहां भी तस्वीर लगी है उसे उतार देना चाहिए।

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किसने पूछा था सवाल ?

पिछले कई दिनों से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना का फोटो लगाने को लेकर विवाद चल रहा है। बरेली के सीबीगंज निवासी बख्तियार खान ने दरगाह आला हजरत मरकजे दारुल इफ्ता उलेमा से जिन्ना का फोटो लगाये जाने को लेकर शरई रोशनी में सवाल पूछा था। इस पर दारुल इफ्ता के जिम्मेदारों शरई रोशनी में फतवा देते हुए जवाब दिया है। जिसमे जिन्ना की तस्वीर लगाना जायज नहीं माना गया है।

भाजपा सांसद सतीश गौतम की चिट्ठी से शुरू हुआ था विवाद

  • विवाद भाजपा सांसद और एएमयू कोर्ट मेंबर सतीश गौतम की चिट्ठी से शुरू हुआ था। छात्रसंघ हॉल में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर सवाल उठाते हुए उन्होंने 26 अप्रैल को वीसी प्रो. तारिक मंसूर को पत्र लिखा।
  • 30 अप्रैल को पत्र सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग की। वहीं, एएमयू छात्र संघ इसे नहीं हटाने पर अड़ा है। तस्वीर हटाने के लिए हिंदू युवा वाहिनी के कुछ कार्यकर्ता एएमयू कैंपस में घुस गए थे। इस दौरान हुए लाठीचार्ज में कई छात्र घायल हो गए थे।

क्या है प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग?

अलीगढ़ में धरना दे रहे छात्रों की मांग है कि जिन्ना की तस्वीर हटाने के लिए कैंपस में घुसे हिंदू युवा वाहिनी के लोगों को गिरफ्तार किया जाए और मामले की न्यायिक जांच हो। जिन्ना प्रकरण को तूल देने के लिए सोशल मीडिया पर समर्थन व विरोध में लगातार मैसेज, फोटो व वीडियो शेयर किए जा रहे हैं।

1938 में एएमयू आए थे जिन्ना

बता दें कि एएमयू के यूनियन हॉल में जिन्ना सहित 30 हस्तियों की तस्वीरें लगी हैं। जिन्ना 1938 में एएमयू आए थे। तभी उन्हें यूनियन की सदस्यता दी गई थी। 1920 में एएमयू के गठन के वक्त महात्मा गांधी पहले मानद सदस्य थे।