चंद्रग्रहण विशेष 2018: जानें क्या होता है चंद्र दोष, इससे बचने के लिए करें ये 3 अचूक उपाय

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हरिद्वार- न्यूज टुडे नेटवर्क: 27 जुलाई को एक सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने वाला है। इस चंद्र ग्रहण की अवधि 1 घंटे और 43 मिनट की होगी। ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा के साथ राहू की युक्ति हो रही हो तो ऐसी अवस्था को चंद्र दोष माना जाता है। इसी अवस्था को चंद्र ग्रहण भी कहा जाता है।

माना जाता है कि इस अवस्था में चंद्रमा पीड़ित होता है और चंद्रमा चूंकि मन का कारक है इसलिये मन में भी विकार पैदा होने लगते हैं। इसके अलावा भी कुछ और अवस्थाएं हैं जिनमें चंद्र दोष होता है। जब चंद्रमा पर राहू की दृष्टि पड़ रही हो तो यह भी चंद्र दोष कहलाता है या फिर चंद्रमा केतु के साथ युक्ति संबंध कर रहा हो तो उसे भी चंद्र दोष माना जाता है। चंद्रमा यदि नीच राशि का हो या फिर नीच ग्रह, अशुभ ग्रह या कहें पाप ग्रहों के साथ हो तो भी चंद्र दोष होता है।

ऐसे में ज्योतिष के अनुसार हम आपके सामने चन्द्र ग्रहण से जुड़ी कुछ बातों का रखने जा रहे हैं। इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य व सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

चंद्र दोष से बचने के उपाय

चंद्र दोष से जाने अंजाने में कोई न कोई पीड़ित हो जाता है, और पीड़ित होने के बाद से ही जातक के जीवन में उथल-पुथल मचने लगती है। वह आशंकित रहने लगता है, भयभीत हो जाता है, लगातार हो रही हानियों से तनावग्रस्त हो जाता है यहां तक पारिवारिक जीवन भी असंतोष से भरने लगता है। कई बार तो जीवन साथी के साथ मतभेद इतने बढ़ जाते हैं कि अलगाव की स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिए चंद्र दोष से बचाव के उपाय जरुर करने चाहिए।

चंद्र दोष से बचाव के लिए पीड़ित को चंद्रमा के अधिदेवता भगवान शिवशंकर की पूजा करनी चाहिए साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप एवं शिव कवच का पाठ भी चंद्र दोष को कम करने में सहायक होता है।

इनके अलावा चंद्रमा का प्रत्याधिदेवता जल को माना गया है और जल तत्व के स्वामी भगवान गणेश हैं इसलिए गणेशोपासना से भी चंद्र दोष दूर होता है विशेषकर तब जब चंद्रमा के साथ केतु युक्ति कर रहा हो।

इनके अलावा दुर्गासप्तशती का पाठ, गौरी, काली, ललिता और भैरव की उपासना से भी राहत मिलती है।