इन 5 वजहों से कर्नाटक में हिली कांग्रेस की नैय्या, मजबूत हुआ कमल

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नई दिल्ली- न्यूज टुडे नेटवर्क: एक बार फिर कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मोदी लहर ने कांग्रेस के किले को ढहाने का काम किया है। लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने से लेकर कर्नाटक का अलग झंडा तक का कार्ड चलने वाले कांग्रेसी सीएम सिद्धारमैया का हर दांव फेल हो गया है। इसमें किसी को भी दो राय नही है कि बीजेपी की जीत का आधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा । ऐसे में आगामी राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ के विधानसभा चुनावों को लेकर भी बीजेपी के कार्यकर्ताओं से लेकर पदाधिकारियों में जोश भर गया है। फिलहाल कर्नाटक में बीजेपी की जीत की मुख्य वजहों को हम आपके सामने रख रहे हैं।

फिर चला मोदी मैजिक

अपने पिछले जीत के रिकॉर्ड को दोहराते हुए पीएम मोदी ने इस बार कर्नाटक चुनाव में भी कमल को खिलाने के लिए पूरजोर मेहनत की। यह भी सच है कि पीएम मोदी के चुनाव प्रचार से पहले कर्नाटक में बीजेपी की हालत ठीक नही थी। 1 मई को मोदी की रैली में बीजेपी के नेता ने उनके सामने ही कहा था मोदीजी आ गए हैं अब तो हमें जीतने से कोई नहीं रोक नहीं सकता है। नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में 21 रैलियां करके बीजेपी की जीत को सुनिश्चित कर दिया।

जातीय समीकरण को साध गये मोदी और योगी

कर्नाटक में बीजेपी की जीत में दूसरा प्रमुख कारण जातीय समीकरण रहा है। बीजेपी कर्नाटक में लिंगायत समुदाय से लेकर आदिवासियों और दलितों को साधने के साथ-साथ ओबीसी मतों को एकजुट करने में बड़ी कामयाबी रही है। पीएम मोदी ने अपनी रैलियों में दलित और आदिवासियों की बात को काफी जोर-शोर से उठाया है। इसके अलावा बीजेपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जरिए हिंदुत्व कार्ड खेला।

येदियुरप्पा और श्रीरामुलू के साथ आने का फायदा

कर्नाटक में बीजेपी के लिए येदियुरप्पा और श्रीरामुलू की वापसी फायदा का सौदा साबित हुई. 2013 के विधानसभा चुनाव में येदियुरप्पा की बगावत ही बीजेपी के लिए महंगी साबित हुई थी। पिछले चुनाव में येदियुरप्पा की पार्टी ने 10 फीसदी और श्रीरामुलू की पार्टी ने करीब 3 फीसदी वोट हासिल किए थे। बीजेपी ने इन दोनों नेताओं को साथ मिलाकर अपनी हार का बदला कांग्रेस से चुका लिया है।

रेड्डी बंधुओं पर दांव

अवैध खनन मामले के आरोपी जनार्दन रेड्डी पर बीजेपी दांव लगाना फायदा का सौदा रहा। बीजेपी ने रेड्डी बंधु के परिवार के करीब आधा दर्जन लोंगो को टिकट दिया था। इसके अलावा उनके कई करीबियों को भी टिकट दिया गया था। रेड्डी बंधु को बेल्लारी के आसपास की सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नतीजों के मुताबिक बेल्लारी इलाके में कमल खिलता दिख रहा है। जबकि रेड्डी बंधुओं को साथ लेने पर बीजेपी की किरकिरी हो रही थी। इसके बावजूद बीजेपी ने रेड्डी का सहयोग लिया और यह फायदा का सौदा साबित हुआ।

लिंगायत का भरोसा कायम

लिंगायत मतों का बीजेपी पर भरोसा कायम रहा। कांग्रेस का उन्हें अलग धर्म का दर्जा देने का कार्ड नहीं चला। कर्नाटक में लिंगायत मतों की बड़ी हिस्सेदारी है और यह किंगमेकर मानी जाती है। 16 फीसदी लिंगायत समुदाय के वोट हैं। लिंगायत के मजबूत गढ़ माने जाने वाले सेंट्रल कर्नाटक में बीजेपी के लिए नतीजे बेहतर आए हैं। इसके अलावा बीजेपी अपने मतों को एकजुट करने में कामयाब रही है जबकि कांग्रेस के वोटबैंक में जबरदस्त सेंधमारी हुई ।

फिलहाल कर्नाटक विधानसभा के नतीजों ने बीजेपी की 2019 का ताज पाने की उम्मीदें बढा दी हैं वहीं देश में घटते जनाधार ने कांग्रेस को सोचने पर मजबूर कर दिया है।