उत्तराखंड़ के “बेलेश्वर महादेव मंदिर” में सावन के महीने में शिवभक्तों की मनोकामना होती है पूरी, जानें क्या है इस मंदिर का पौराणिक महत्व

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टिहरी- न्यूज टुडे नेटवर्क: उत्तराखंड की धरती को यूं ही देवभूमि नही कह जाता। यहाँ के कण-कण में देवों का वास है। यही वजह है कि उत्तराखंड में आध्यात्मिक और भक्ति के सागर में गोते लगाने के लिए हर साल लाखों- लाख देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। इन दिनों भगवान शिव के पवित्र सावन के महीना चल रहा है।

कुछ इस तरह सावन के महीने में घनसाली के बेलेश्वर महादेव मंदिर में जुटते हैं देश- विदेश के श्रद्धालु

ऐसे में घनसाली विकास खंड भिलंगना की पट्टी केमर घाटी में बेलेश्वर क्षेत्र के एक मात्र शिव मंदिर Beleshwar mahadev mandir अनूठी आस्था का केन्द्र बना रहता है। इस शिव मंदिर को पांडव काल के इतिहास से माना जाता है। यहां स्थित शिव मंदिर मे केदारनाथ के मंदिर के तरह का शिवलिंग विराजमान है। इसे सबसे पुराने केदार के रूप में भी माना जाता है।

कैसे पहुंचे बेलेश्वर महादेव मंदिर

इन दिनों श्रावण मास में बेलेश्वर महादेव मंदिर में हर दिन पूजा अर्चना होती है। टिहरी जिला मुख्यालय से 60 किमी दूरी तय कर घनसाली आने के बाद घनसाली-चमियाला मोटर मार्ग पर घनसाली से 8 किमी की दूरी पर बेलेश्वर शिव मंदिर स्थित है। जो कि सड़क से मात्र 500 मीटर की दूरी पर बना है। यहां पहुंचने के लिए बस और प्राइवेट टैक्सी के माध्यम से आसानी से आया जा सकता है।

जानें क्या है बेलेश्वर शिव मंदिर का पौराणिक महत्व

बेलेश्वर शिव मंदिर का इतिहास महाभारत के स्कंद पुराण मे वर्णन मिलता है। इस मंदिर को पांडव काल के शिव मदिरों में एक माना जाता है। कहा जाता है कि यहां जब पांडव कैलाश यात्रा के लिये निकले थे तो रात्रि विश्राम के समय शिव भगवान ने पांडवों को भील के रूप मे दर्शन दिए थे और उन्हें आशीर्वाद दिया था कि कैलाश यात्रा के बाद मोक्ष को प्राप्त होगा क्योंकि कलयुग का आरंभ होने वाला है। वहां भी पांडवों ने रात्रि विश्राम के दौरान पत्थरों पर कुछ लेख भी लिखे हैं जो आज भी मंदिर के आस-पास दिखायी देते हैं।

यही नहीं उक्त शिव मंदिर का शिवलिंग भी केदारनाथ के मंदिर के शिवलिंग के समान है, यही वजह है कि श्रद्धालु, बेलेश्वर शिव मंदिर को प्रथम केदार के रूप में मानते है। भील के रूप मे दर्शन देने के बाद उक्त जगह का नाम ही बेलेश्वर महादेव पड़ा।

बेलेश्वर शिव मंदिर के पुजारी देवेन्द्र तिवारी

बेलेश्वर शिव मंदिर के पुजारी देवेन्द्र तिवारी बताते हैं कि शिव मंदिर पांडव काल से निर्मित है लेकिन अब इसे क्षेत्र के लोगों नया स्वरूप दिया गया है। वैसे तो मंदिर मे वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन सावन के महीने में सबसे अधिक श्रद्धालु यहां आते है। संतान प्राप्ति के लिये कई दिनों से निर्जल व्रत और रूद्रीपाठ करके रूद्राभिषेक करते हैं। यही वजह है कि यहाँ आने वाले भक्तों का यह विश्वास है कि सावन के महीने में इस शिव मंदिर में आराधना करने से मन की हर मनोकामना पूरी होती है।