हल्द्वानी : शर्म करो सरकार, सर्किल रेट की मत मारो मार…

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हल्द्वानी. कांग्रेस नेता हेमन्त साहू के नेतृव में सर्किल रेट बढ़ाये जाने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए पटेल चौक में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का पुतला दहन किया.

शर्म

इस दौरान आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुऐ कांग्रेस नेता हेमन्त साहू ने कहा प्रदेश सरकार ने पहले बिजली पानी स्वास्थ्य सेवाओं में मंहगाई की मार दी अब सर्किल रेट बढ़ाकर गरीबों के जगह खरीदने व मकान बनाने के सपनों को चकना चूर करने का काम किया है.

प्रदेश सरकार की तानाशाही के खिलाफ जनहित में आन्दोलन जारी रहेगा युवा नेता विशाल भारती अलका आर्या मुकेश जोशी सरफराज अहमद रिजवान हुसैन लछमी नारायण साहिल राज ने कहा प्रदेश सरकार हिटलशाही पर उतारू है.

प्रदेश सरकार की तानाशाही परेशान हैं भाजपा की सरकार ने अच्छे दिनों का सपना दिखाकर वोट हासिल किया है इस दौरान जमील कुरैशी दीपक बड़सिलिया शुभम् ठाकुर विनोद कांडपाल सौरभ तिवाड़ी अरबाज खान विशाल कुमार मो तस्लीम रवि जोशी गीता देबी विवेक बड़सीलिया अमरनाथ जोशी मनोज चन्द्र शर्मा आनन्द चन्द्रा किरन माहेश्वरी रेहान हुसैन समेत तमाम लोग थे.

रूद्रपुर- सीडीओ ने दी बेरोजगारों को नसीहत- नौकरी का सपना ना पालें , खुद बने मालिक

बेरोजगार ना पालें नौकरी का सपना
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रूद्रपुर- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार व उत्तराखण्ड सरकार द्वारा 30 जनवरी तक आयोजित होने वाले एमएसएमई पखवाड़े का विधिवत शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी आलोक कुमार पाण्डेय द्वारा जिला उद्योग केन्द्र सभागार में किया गया।
बेरोजगार ना पालें नौकरी का सपना

युवा ना हों नौकरी के लिए परेशान

सीडीओ आलोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि तकनीकि के दौर में नए-नए रोजगार के साधनों का सृजन हो रहा है तथा मालिकों की संख्या में कमी आकर बेरोजगारों की संख्या में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी के लिए परेशान नहीं होना चाहिए बल्कि बाजार का अध्ययन करते हुए सकारात्मक सोच, नई ऊर्जा व उमंग के साथ उद्यमिता विकास हेतु सरकार द्वारा स्टार्ट अप सहित चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर स्वयं का कारोबार स्थापित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सोच नौकरी के स्थान पर मालिक बनकर दूसरों को नौकरी देने की होनी चाहिए।

बेरोजगार ना पालें नौकरी का सपना

कारोबारी उठायें 5 दिवसीय जीएसटी कार्यशाला का लाभ

उन्होंने मोबाईल तकनीकी का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी कार्य की शुरूआत में कुछ कठिनाईयां अवश्य आती हैं परन्तु उस तकनीकी की पूरी जानकारी/प्रेक्टिस होने पर उसका बहुत अधिक लाभ मिलता है तथा हमारे जीवन का अभिन्न हिस्स भी बन जाता है। उन्होंने कहा कि वैसे ही जीएसटी नया कर है तथा विभिन्न कारणों/जानकारी के अभाव में कुछ दिक्कतें अवश्य आ रही होंगी। उन्होंने कार्यशाला में आए उद्यमियों/विभिन्न कम्पनियों के प्रतिनिधियों को एमएसएमई योजनान्तर्गत चलने वाले 05 दिवसीय जीएसटी कार्यशाला का भरपूर लाभ उठाने को कहा।

एमएसएमई के निदेशक वीके शर्मा ने बताया कि नए उद्योगों की स्थापना के लिए उद्यमियों को अनुकूल वातावरण स्थापित करना, विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभांवित करते हुए उद्योगों का बढ़ावा देना व रोजगार के नये अवसर पैदा करना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है। प्रशिक्षक सीए अमित अरोरा व हैमन्त सिंघल द्वारा उद्यमियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन, ई-वे बिल, रिटर्न फाईल करना, जीएसटी के लाभ व नियम, बेसिक जानकारी दी तथा उद्यमियों द्वारा पूछे गये सवालों व जिज्ञासाओं का भी समाधान किया गया। इस अवसर पर महाप्रबन्धक जिला उद्योग केन्द्र चंचल बोहरा, मुनीष त्यागी, प्रवीण कुमार सहित उद्यमी/प्रशिक्षणार्थी आदि उपस्थित थे।

उत्तराखंड़- कारोबारी के ‘सुसाइड’ से डर गई सरकार ! लिया एक नया फैसला

BJP's Janta Darbar in Uttarakhand
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देहरादून- प्रदेश कार्यालय में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, नैनीताल सांसद भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व सांसद बलराज पासी समेत कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सम्पन्न हो गई है। नगर निकाय चुनावों से लेकर जनता दरबार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

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अजय भट्ट

बीजेपी आफिस में जनता दरबार पर संशय

अजय भट्ट ने कहा कि पार्टी के दफ्तरों में लगने वाले जनता दरबार पर कोई रोक नही है लेकिन सरकार अब स्थानीय स्तर पर भी जनता दरबार लगायेगी, जिससे आम लोगों की दिक्कतों के समाधान के लिए अपने इलाके से दूर ना जाना पड़े। इस सिलसिले में जल्द पार्टी नेताओं की अहम बैठक होगी।

बता दें कि बीते 6 जनवरी को बीजेपी आफिस में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के जनता दरबार में हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट कारोबारी प्रकाश पाण्डे के जहर खाकर हुई मौत की घटना से सरकार अब फूंक फूंक कर कदम रखना चाहती है। वहीं इस मामले में डीएम द्वारा घोषित मुआवजे के मुद्दे पर भी त्रिवेन्द्र सरकार कांग्रेस के निशाने पर है।

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देहरादून के बीजेपी आफिस में जहर खाकर पहुंचे थे हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट कारोबारी प्रकाश पाण्डे (फाईल फोटो)

कांग्रेसी चाहें तो दे दें बीजेपी को चंदा

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि मीटिंग के दौरान आगामी निकाय चुनावों और परिसीमन को लेकर चर्चा की गई। अजय भट्ट ने बताया कि आगामी कोर ग्रुप की बैठक 11 फरवरी को होगी। आजीवन सहयोग निधि चंदे पर कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस वाले चाहें तो वो भी पार्टी को चंदा दे सकते हैं उन्हें कोई आपत्ति नही होगी।

रूद्रप्रयाग : गैरसैंण के वासिंदो ने जलाई ऐसी मसाल, जिसे भुला नहीं पाएगी सरकार…

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रूद्रप्रयाग. गैरसैंण स्थाई राजधानी की मांग को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं. इसी कड़ी में आज रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में स्थानीय लोगों ने जनगीत के साथ मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध जताया. इस मौके पर वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार ने जल्द गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित नहीं किया तो जनता उग्र आंदोलन करेगी.

गैरसैंण

अगस्त्यमुनि में व्यापारियों, छात्रों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने अगस्त्यमुनि कोतवाली से विजयनगर तक जनगीत के साथ मशाल जुलूस निकाला. बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने विरोध प्रकट करते हुए कहा कि पिछले 17 सालों से सरकारें स्थाई राजधानी तय नहीं कर पाई हैं. यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है. कर्ज के बोझ के तले दबे एक छोटे से प्रदेश में दो-दो राजधानी ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन बनाने की बातें कही जा रही हैं. जिसका विरोध किया जाएगा. गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने के बाद ही आंदोलन को समाप्त किया जाएगा.

वक्ताओं ने यह भी कहा कि गैरसैंण स्थाई राजधानी बनने से पहाड़ में विकास का विकेन्द्रीकरण होगा. गांव से हो रहे पलायन पर अंकुश लगने के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के रास्ते खुलेंगे. व्यापारियों ने कहा कि पहाड़ खाली होने से उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है. इसी तरह गांव के गांव खाली होते रहे तो एक दिन उनका व्यवसाय पूरी तरह चरमरा जाएगा. इस मौके पर सैकड़ों संख्या में आंदोलनकारी मौजूद थे.

13 साल का बच्चा बन गया है टीचर, पढ़ाता है सैंकडो बच्चो को…

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जब किसी इंसान के अंदर कुछ करने की लगन हो, तो चाहे आंधी हो या तूफान कोई भी रुकावटें उसके आगे टिक नहीं पाती, उसमें भी अगर किसी का हित करने की भावना हो तो कोई बाधा रास्ता नहीं रोक सकती. इस बात का सीधा संदर्भ है लखनऊ के आनंद कृष्ण मिश्र से, आनंद की उम्र अभी मात्र 13 साल है लेकिन उनके जो सपने और काम है उनकी उम्र से कहीं ज्यादा गुना बढ़े हैं.

आनंद बच्चो को पढ़ाते हुए

आनंद अभी 9वीं कक्षा में पढ़ते हैं और पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट आते हैं. आनंद को 2013 लखनऊ महोत्सव में शहजादे अवध का खिताब भी मिल चुका है. और स्पोर्ट्स में भी धुरंधर हैं. लेकिन इससे कहीं बड़ी बात यह है कि, वह 9 साल की उम्र से ही गांव में रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं. वह गांव-गांव जाकर ‘बाल चौपाल’ लगते हैं और स्कूल न जाने वाले बच्चों को पढ़ाते हैं. आनंद का मकसद ऐसे बच्चों को आत्म-निर्भर बनाना है.

बाल चौपाल मतलब- किसी एक जगह ढेर-सारे बच्चो को इकट्ठा करके उनको पढ़ाना.
बाल चौपाल करते हुए आनंद

आनंद का कहना है कि वह नहीं चाहते कोई भी बच्चा बाल मजदूरी करे, इसके लिए वो कड़ी मेहनत करते हैं और गांव के सभी बच्चो को पढ़ाते हैं.

कैसे की शुरूवात,,, ‘हम होंगे कामयाब’ गीत से.

 

Boy

बाल चौपाल की शुरुआत उन्होंने लखनऊ से 12 किलोमीटर दूर काकोरी के भवानी खेड़ा गांव से की थी. इसके बाद और भी गांव में चौपाल लगाकर बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. आनंद सिर्फ 5 घंटे सोते हैं और उसका ज्यादा समय पढ़ने और पढ़ाने में ही जाता है. आनंद बच्चो को साइबर वर्ल्ड के बारे में भी बताते हैं, बच्चो को बताते हैं कि कैसे इंटरनेट काम करता है और इसकी सही जानकारी उनको देते हैं.

आनंद का कहना है कि, कुछ वर्ष पहले उन्होंने एक बच्चे को मोमबत्ती की रोशनी में पढाई करते देखा, जो संस्कृत और मराठी दोनों जानता था. इसके बाद आनंद के मन में विचार आया कि ऐसे कितने की प्रतिभावान बच्चे होंगे जिनके पास अवसर का अभाव होगा. आनंद ने अपने पिता से सलाह ली और चौपाल लगानी शुरु कर दी. ‘हम होंगे कामयाब’ गीत के साथ शुरु होने वाले इस चौपाल में योग भी होता है.

अक्सर घर वाले लड़कियों को दूर दराज के स्कूल में नहीं भेजते इसलिए आनंद उनके लिए एक स्कूल खोलना चाहते हैं, इसके लिए वह राज्यपाल को चिट्ठी भी लिख चुके हैं. आनंद खुद एक आईएएस अफसर बनना चाहते हैं.

रूद्रपुर- कक्षा 1 से 5 वीं तक के स्कूल रहेंगे 20 जनवरी तक बन्द, जानिये किन स्कूलों पर लागू होगा डीएम का ये आदेश

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रूद्रपुर – उधमसिंहनगर के डीएम डॉ. नीरज खैरवाल स्कूलों में पढने वाले नौनिहालों के लिए बेहद फिक्रमंद हैं। यही वजह है कि जैसे ही डीएम को पता चला कि आने वाले 4 दिन बच्चों की सेहत के लिहाज से अनुकूल नही हैं तो उन्होंने फौरन शिक्षा विभाग को स्कूल बन्द रखने का फरमान सुना दिया।

Dr Neeraj Khairwal
डीएम डॉ. नीरज खैरवाल

जनपद के सभी ऑगनबाड़ी केन्द्रों में अध्ययनरत बच्चों एवं सरकारी/अर्द्ध सरकारी/प्राईवेट विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 5 तक के सभी बच्चों का 20 जनवरी तक अवकाश घोषित किया है। दरअसल जिलाधिकारी डॉ. नीरज खैरवाल ने मौसम विभाग से प्राप्त सूचना को दृष्टिगत रखते हुए यह आदेश दिया है।

आदेश ना मानने वालों की खैर नहीं

डीएम ने उक्त अवधि के दौरान सरकारी विद्यालयों/संस्थाओं एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों के समस्त स्टॉफ को अपने-अपने कार्य स्थल पर उपस्थित रहने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उक्त आदेशों की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिये।

दुनिया की सबसे ज्यादा बाल वाली लड़की ने जब पहली बार देखा अपना चेहरा,वजह दिलचस्प है…

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आज हम आपको ऐसे शख्स से मिलाने जा रहे हैं जिसको दुनिया की सबसे ज्यादा बालों वाली लड़की का दर्जा मिला है. इस लड़की का नाम है सुपात्रा ससुफान (नैटी). नैटी थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में रहती है. गिनीज बुक ने भी इनको सबसे ज्यादा बालो वाली लड़की का दर्जा दे दिया है मतलब इनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है.

Supatra

और ताज़ा खबर ये है कि नैटी अपने बाल छिलवा रही हैं. क्योंकि इनको इश्क हो गया है .

Source : Google

नैटी जिस जेनेटिक अवस्था के साथ पैदा हुईं, उसे अमब्रास सिंड्रोम कहते हैं. जिसे वेयरवुल्फ सिंड्रोम भी कहते हैं. माने जब आप भेड़िये जैसे दिखने लगें. इस अवस्था में पूरे शरीर में हद से ज्यादा बाल निकल आते हैं.इन्हें 2010 में दुनिया की सबसे ज्यादा बाल वाली लड़की घोषित किया गया था.

जिस दिन नैटी पैदा हुई, उसी दिन उसके मां-बाप को एहसास हो गया कि इस बच्ची का आने वाला जीवन बहुत कठिन होने वाला है. पैदा होने के बाद भी नैटी का इलाज चलता रहा. क्योंकि नाक के छेद छोटे होने की वजह से वो सांस नहीं ले पाती थी.

जब हम नैटी की तस्वीरें देखकर ही शॉक महसूस कर रहे हैं, तो जरा सोचिए नैटी को हकिक़त में लोग देखकर क्या-क्या टिप्पणियां करते होंगे.

सुपात्रा के पिता से सब पूछते थे कि उन्होंने ऐसा कौन सा पाप किया था कि ऐसी बच्ची पैदा हुई. नैटी के दांत धीरे उग रहे थे और उससे ठीक से देखा नहीं जाता था.

ऐसा नहीं है कि घर वालों ने लेज़र ट्रीटमेंट से उसके बालों की ग्रोथ रोकने की कोशिश की. मगर उसके बाल हर हाल में बढ़ते गए. मगर दुनिया का मजाक, उनका असहज होना, बुरी बातें कहना, सुपात्रा ने हर चीज सहते हुए भी आपनी अवस्था को अपनाया. स्कूल में सबकुछ एक नॉर्मल बच्ची की तरह किया. क्योंकि नॉर्मल तो वो थी ही.

कुछ ही साल में नैटी ने दिखा दिया कि वो किसी भी और बच्चे से पीछे नहीं है. जिसके बाद स्कूल के बच्चों ने उसे ‘बंदर’ जैसे नामों से बुलाना बंद कर दिया.

नैटी अब 17 साल की हो गई है. उसे अपना प्यार मिल गया है. वो अब अपने बाल शेव भी करती है. शेव न भी करती तो भी उतनी ही खूबसूरत लगती जितनी आज शेव करके है.

26 जनवरी को पौड़ी में गूंजेंगे देशभक्ति के गीत और शहर होगा जगमग- डीएम सुशील कुमार

Republic Day पौड़ी में गणतंत्र दिवस
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पौड़ी- शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा… देश की आजादी के खातिर अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर सपूतों को नमन करने वाला गणतंत्र दिवस एक बार फिर आने को बेताब है। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का आयोजन को खास बनाने के लिए जिला प्रशासन ने भी मुस्तैद हो गया है। जिलाधिकारी सुशील कुमार की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में गणतंत्र दिवस की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित की गई। डीएम ने कहा कि गणतंत्र दिवस को प्रातः 9:30 बजे सभी सरकारी, गैरसरकारी कार्यालयों एवं भवनों पर झण्डारोहण किया जाएगा।

Republic Day पौड़ी में गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस पर होंगे ये कार्यक्रम

10.30 बजे सार्वजनिक रूप से कण्डोलिया मैदान में ध्वजारोहण किया जाएगा। जिसमें पुलिस विभाग, एनसीसी कैडिट्स, स्काउट, होमगार्ड द्वारा मार्चपास्ट व शिक्षा विभाग के विभिन्न स्कूलों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान नाटक, पेंटिंग, खेलकूद आदि कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने सभी सरकारी एवं अर्द्ध सरकारी विभागों को निर्देश दिए हैं कि 25 व 26 जनवरी को अपने-अपने कार्यालय भवनों के अलावा शहीद स्मारकों एवं मूर्ति स्थलों में सायं 6 बजे से रात्रि 11 बजे तक प्रकाशमान किए जाने की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर सभी अधिकारी कर्मचारी एवं सभी नगर निगम, नगर पंचायत सफाई अभियान चलाकर सफाई पर विशेष ध्यान देंगे। इसके अतिरिक्त विशेष सफाई अभियान के लिए शहरी क्षेत्रों में नगर पालिकाओं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज विभाग के माध्यम से स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रमों को गति प्रदान की जायेगी।

Republic Day पौड़ी में गणतंत्र दिवस

इस क्रम में कल 17 जनवरी को विकास भवन तथा 18 जनवरी को मलिन बस्ती में सफाई अभियान चलेगा। उन्होंने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे कल से आगामी 31 जनवरी तक शहर के मुख्य स्थलों के साथ ही सभी वार्डों में विशेष सफाई चलायें। 25 जनवरी को 10.30 बजे से क्रॉस कंट्री दौड़ का आयोजन पौड़ी तथा कोटद्वार में दोपहर बाद 3.00 बजे से खेल विभाग द्वारा किया जाएगा। जिलाधिकारी ने 25 व 26 जनवरी को स्थानीय निकाय व नगर पालिकाओं के माध्यम से पूरे जनपद के चौराहों, तिराहों, शहीद स्मारकों, मूर्ति स्थलों में राष्ट्रीय देशभक्ति गीतों का प्रसारण किए जाने के निर्देश दिए।

सम्मानित होंगे स्वतंत्रता सेनानी

इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों एवं गणमान्य व्यक्तियों को भी सम्मानित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने तहसीलों में गणतंत्र दिवस के पर्व को सौहार्दपूर्ण मनायें। इस अवसर पर जिला चिकित्सालयों में रोगियों को फल वितरण कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित किया जाएगा। जिसमें महिला शरणालय कोटद्वार तथा कुष्ट आश्रम श्रीनगर में भी फलों का वितरण किया जाएगा।

इस बार मुख्य कार्यक्रम कंडोलिया मैदान में कार्यक्रमों का समापन राष्ट्रगान के साथ किया जायेगा। बैठक में अपर जिलाधिकारी रामजी शरण शर्मा, एसडीएम सदर केएस नेगी, जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश, जिला पंचायत राज अधिकारी एमएम खान, सहायक परियोजना निदेशक सुनील कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक कुंवर सिंह रावत के साथ ही गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

मुंबई: 15 साल की उम्र तक नही हुए थे मेरे पीरियड्स स्टार्ट, थी बहुत परेशान- सोनम कपूर

Sonam Kapoor
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मुम्बई- अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ रिलीज से पहले ही हिट होती नजर आ रही है। हर दूसरा शख्स इस फिल्म के बारे में बात कर रहा है। हाल ही में पीरियड्स और महिलाओं के साथ होने वाले भेद-भाव के बारे में अक्षय के साथ ही फिल्म की एक्ट्रेस सोनम कपूर ने खुलकर बात की।

पैडमेन है ट्विंकल का आइडिया

अक्षय ने कहा कि शुक्र है आज की जेनरेशन मेरे से पहले ही ये सब जान गई है। मेरी पत्नी ने ही आरव को ये सब बताया। मेरे घर में कोई भी बात छिपी नहीं है। मैं नहीं चाहता कि जो बात मैं लोगों से कर रहा हूं उसे अपने ही घरवालों से छिपाऊं। पैड मैन ट्विंकल का ही कंटेंट है और उसी का आइडिया है।

पीरियड्स को लेकर थी परेशान

प्रमोशन के दौरान फिल्म एक्ट्रेस सोनम कपूर ने पीरियड्स को लेकर अपना एक एक्सपीरियंस शेयर किया है। सोनम ने कहा, मैं 15 साल की हो गई थी और मुझे तब तक पीरियड्स स्टार्ट नहीं हुए थे। मेरी सारी फ्रेंड्स को पीरियड्स स्टार्ट हो गए थे। मैं बहुत दुखी रहती थी कि मेरी सभी फ्रेंड्स को पीरियड्स हो रहे हैं और मुझे नहीं। मुझे लगता था कि जरूर मुझमें कोई दिक्कत होगी जो मुझे अभी तक पीरियड्स नहीं हुए। मैं अपनी मम्मी से पूछती थी कि मुझे पीरियड्स क्यों नहीं हो रहे। उसके बाद जब फाइनली मुझे पीरियड्स हुए तब मैं बहुत खुश थी।

 पीरियड्स में ज्यादा महिलाएं यूज नही करती  सैनेटरी नैपकिन

सोनम से पूछा गया कि वो दूसरी महिलाओं को पीरियड्स से रिलेटेड क्या सुझाव देंगी तो सोनम ने कहा, ‘पीरियड्स के दौरान जब पेट में दर्द होता है तो हॉट पैक्स को यूज करने से आराम मिलता है। हमें इस दौरान ज्यादा पानी पीना चाहिए। ज्यादातर लोगों को लगता है कि इस दौरान रेस्ट करना चाहिए, लेकिन इस समय लड़कियों को ज्यादा वर्कआउट करना चाहिए। गांव की महिलाओं को लेकर सोनम ने कहा, ‘सिर्फ 12% महिलाएं ही सैनेटरी नैपकिन यूज करती हैं। ये संख्या बहुत ही कम है। बता दें कि कुछ दिनों पहले सोनम ने कहा था कि उनकी दादी उन्हें किचन और मंदिर में एंट्री करने से साफ मना कर देती थीं। सोनम ने आगे बताया कि जब शहर में लड़कियों पर इतनी पाबंदी थी तो गांव में लड़कियों का क्या हाल होता होगा, ये तो समझ ही सकते हैं।

सोनम ने कहा कि लोग पीरियड्स के बारे में बात नहीं करना चाहते। वो इस टॉपिक पर बात करने से कतराते हैं। हालांकि शहर में लड़कियों के लिए ये आम बात है। सोनम कपूर ने कहा कि जब मैं माहेश्वर में फिल्म की शूटिंग कर रही थी तब वहां के लोगों की पीरियड्स को लेकर इग्नोरेंस देख मैं हैरान रह गई थी। हां, लेकिन जब पब्लिक फिगर इन मुद्दों पर बात करता है तो उन पर असर जरूर पड़ता है।

बागेश्वर- बंदरों के आतंक से पहाड़ है परेशान, अब एटीएम के अंदर पहुंचने लगे हैं बंदर

Monkey inside the ATM
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बागेश्वर- उत्तराखंड़ के पहाड़ों में रहने वाले वन विभाग और नेताओं से कहते कहते थक गये , साहब इन बंदरों से हमें बचाइये, हमारे बाग-बगीचों के साथ साथ ये हमें काट खाने को दौड़ते हैं। लेकिन ना तो सरकार और ना ही वन विभाग कभी भी ग्रामीणों की इन शिकायतों पर संजीदा नजर आये।

कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों बागेश्वर के लोगों का है। बंदरों से परेशान इस पहाड़ी इलाके में बीते सोमवार को कुछ ऐसा घटा जिसे देख हर कोई दंग रह गया। बागेश्वर तहसील रोड स्थित एसबीआई के एटीएम में घुसे बंदर ने कुछ ऐसा किया कि देखने वाले हैरान रह गए।

जब बंदर लगा कैश निकालने

शहर में बंदरों की दहशत है कि एसबीआई के एटीएम पर लगी भीड़ को पीछे करते हुए एटीएम के भीतर बंदर घुस गया। उसने वहां मशीन से छेड़छाड़ की। बंदर यहां मशीन के बटनों को छेड़ने लगा। बंदर की हरकतों से ऐसा लग रहा था जैसे वह मशीन से कुछ निकालना चाह रहा है। इस दौरान कैश निकालने के लिए लाईन में लगे लोगों में भगदड़ भी मची। हर कोई बंदर की इस करतूत को देखना तो चाह रहा था लेकिन यह डर भी लग रहा था कि कहीं बंदर उन्हें काट ना ले। इसलिए लोगों ने एटीएम से दूर हटने में ही भलाई समझी।

करीब 15 मिनट तक बंदर एटीएम मशीन पर छेड़छाड़ करता रहा। और जब उसे मशीन से कुछ भी नही मिला तो उसने भागने में ही भलाई समझी। एटीएम की लाईन में लगे संजय सिंह, हेमंत, बबलू और विनोद ने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र में बंदरों का आतंक कायम है। राह चलते बंदरों के आतंक से निजात की गुहार कई बार वन विभाग से लगाई गई है , लेकिन अब तक कोई समाधान नही निकला है।

BHEL में निकली है बंम्पर नौकरियां,10वीं पास से लेकर बीटेक वालों को मिलेगी नौकरी; ऐसे करें आवेदन

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भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में ट्रेड अप्रेंटिस पद के लिए वैकेंसी निकल गई है। आवेदन के लिए अंतिम तिथि 3 फरवरी रखी गई हैं। सभी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन निःशुल्क है। कुल पदः 750 पद का विवरणः ट्रेड अप्रेंटिस वेबसाइटः www.bhelbpl.co.in शैक्षणिक योग्यताः 10वीं पास एवं संबंधित ट्रेड में आईटीआई आयु सीमाः 14 से 25 वर्ष ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 03 फरवरी, 2018

ऐसे करें आवेदन:

ऑनलाइन आवेदन करें और उसके प्रिंटआउट के साथ सभी संबंधित प्रमाणपत्रों की स्वप्रमाणित प्रतियों को संलग्न कर ‘पोस्ट बॉक्स नंबर 35, पोस्ट ऑफिस पिपलानी, बीएचईएल भोपाल, पिन कोड- 462022’ के पते पर 10 फरवरी, 2018 तक भेज दें। आवेदन शुल्कः सभी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन निःशुल्क चयन प्रक्रियाः इन पदों पर आवेदकों का चयन मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा।

मैनेजमेंट ट्रेनी बनने का मौका

पद का नामः मैनेजमेंट ट्रेनी (इंस्ट्रूमेंटेशन/ केमिकल/ मैकेनिकल/ इलेक्ट्रिकल)
कुल पद: 61
शैक्षणिक योग्यताः संबंधित ट्रेड में इंजीनियरिंग डिग्री
आयु सीमाः अधिकतम 27 वर्ष
अंतिम तिथिः 09 फरवरी, 2018
आवेदन प्रक्रियाः ऑनलाइन आवेदन शुल्कः उम्मीदवारों के लिए 700 रुपये तथा SC/ SC/ PWD वर्ग के लिए आवेदन निःशुल्क है।
चयन प्रक्रियाः चयन गेट 2016 में प्राप्त अंकों एवं साक्षात्कार के जरिये किया जाएगा।
प्रोजेक्ट इंजीनियर व अन्य पदों पर भर्ती
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग
कुल पदः 53
पदों का नामः प्रोजेक्ट मैनेजर, प्रोजेक्ट इंजीनियर और प्रोजेक्ट सपोर्ट स्टाफ

शैक्षणिक योग्यताः बीई/ बीटेक/ एमई/ एमटेक डिग्री
आयु सीमाः अधिकतम 33/ 37/ 50 वर्ष (पदानुसार)
ऐसे करें आवेदनः इन पदों पर ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन करने के लिए इच्छुक उम्मीदवार संबंधित वेबसाइट पर जाएं और मौजूद दिशा-निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें।
अंतिम तिथिः 31 जनवरी, 2018
चयन प्रक्रियाः आवेदकों का चयन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा।

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हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड, रांची

वेबसाइटः www.hecltd.com
पद का नाम- सीनियर मैनेजर/ एडिशनल जनरल मैनेजर
शैक्षणिक योग्यताः सीए / परास्नातक उपाधि निर्धारित अनुभव (पदानुसार)
अंतिम तिथिः 28 जनवरी, 2018
आवेदन शुल्कः 800 रुपये (एससी/ एसटी/ पीडब्‍ल्यूडी वर्ग के लिए आवेदन निःशुल्क है)
आयु सीमाः अधिकतम आयु 44/ 52 वर्ष (पदानुसार)
आवेदन प्रक्रियाः उम्मीदवार संबंधित वेबसाइट पर जाएं और मौजूद दिशा-निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें। आवेदन पूर्ण हो जाने के बाद उसका प्रिंटआउट आगामी चयन प्रक्रिया के लिए सुरक्षित रख लें।
चयनः आवेदकों का चयन लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के जरिये होगा।

देवभूमि के जंगल दे रहे हैं 107 बिलियन रुपये की पर्यावरण सेवा, फिर भी नहीं मिल पा रहा है ग्रीन बोनस…

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देहरादून. उत्तराखंड राज्य को यूं ही नहीं देवभूमि कहते हैं, हमारी इसी देवभूमि की वजह से देश को प्रदूषण से लड़ने और सांस लेने लायक शुद्ध हवा मिलती है. उत्तराखंड के इस योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना तो मिलती आ रही है, मगर यह बात भी सच है कि इसके एवज में प्रतिपूर्ति के मुद्दे को अभी तक अनसुना ही किया जा रहा है.

Uttarakhand

यह ठीक है कि विषम भूगोल और दुरूह परिस्थितियों के मद्देनजर हिमालयी राज्यों के सामने पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन साधने की सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन उत्तराखंड को इससे कई अधिक जूझना पड़ रहा है. इसीलिए राज्य की ओर से पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में ग्रीन बोनस अथवा इसी तरह के अन्य इंसेटिव की मांग लगातार उठाई जा रही है. अब प्रदेश में ‘डबल इंजन’ की सरकार है तो उम्मीद बंधी है कि आम बजट में केंद्र सरकार इसके लिए कुछ न कुछ पहल अवश्य करेगी.

आखिर है क्या ग्रीन बोनस

मैदानी क्षेत्रों द्वारा फैलाये गये प्रदूषण को पहाड़ी क्षेत्र दूर करते हैं, इसलिए उन्हें इस कार्य का पेमेंट किया जाना चाहिए. मैदानी राज्यों में उद्योगों एवं गाड़ियों द्वारा छोड़ी गयी जहरीली कार्बन डाइ आक्साइड गैस को पहाड़ी राज्यों के जंगल सोख लेते हैं इससे मैदानी राज्य के लोग कार्बन उत्सजर्न के दुष्प्रभावों जैसे दूषित वायु के कारण होने वाले रोग से बच जाते हैं. वायुमंडल का तापमान कम हो जाता है और पंखा और एयरकंडीशनर को चलाने में लगने वाली बिजली की बचत होती है. लेकिन पहाड़ी राज्यों को हानि होती है. वे जंगल काट कर लकड़ी बेचने और खेती करने से वंचित हो जाते हैं.

यह किसी से छिपा नहीं है कि 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में जंगल सहेजकर आबोहवा को स्वच्छ रखना यहां की परंपरा में शुमार रहा है. इसीलिए उत्तराखंड के जंगल अन्य राज्यों की तुलना में अधिक महफूज हैं। कुल भूभाग का 46 फीसद वनावरण इसकी तस्दीक भी करता है. इससे न सिर्फ पहाड़ सुरक्षित हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रमुख कारक हवा, मिट्टी, पानी भी.

एक अनुमान के मुताबिक अकेले यहां के जंगलों से ही हल साल 107 बिलियन रुपये की पर्यावरणीय सेवाएं मिल रही हैं. यही नहीं, हर साल ही वर्षाकाल में बड़े पैमाने पर यहां की नदियां अपने साथ बहाकर ले जाने वाली करोड़ों टन मिट्टी निचले इलाकों को उपजाऊ माटी देती आ रही है.

इन्हीं पर्यावरणीय सेवाओं को सहेजने में राज्य वासियों को दुश्वारियों से भी दो-चार होना पड़ रहा है. वन कानूनों की बंदिशों के चलते बड़ी संख्या में परियोजनाओं को आकार नहीं मिल पा रहा है. संरक्षित क्षेत्रों और इको सेंसिटिव जोन के प्रावधानों ने नींद उड़ाई हुई है.

यही नहीं, खेती को वन्यजीव चौपट कर रहे हैं, सो अलग. पहाड़ के गांवों से निरंतर हो रहे पलायन के पीछे वन कानूनों के कारण सुविधाओं का न पसर पाना और वन्यजीवों का खौफ भी हैं.

हालांकि, केंद्र की मौजूदा सरकार ने सत्तासीन होने के बाद हिमालयी राज्यों और यहां के विकास के मॉडल को लेकर कुछ रुचि जरूर दिखाई, मगर ग्रीन बोनस पर बात अभी तक अटकी है. अब जबकि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर यह तैयारियों का साल भी है तो सभी के मन में यह उम्मीद है कि केंद्र इस बजट में ग्रीन बोनस का कुछ न कुछ प्रावधान अवश्य करेगा.