जन्मदिन स्पेशल- पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की कही वो 11 बातें, जिन पर विरोधियों ने भी बजाई खूब तालियाँ

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नई दिल्ली- बीजेपी के कद्दावर नेता, प्रखर प्रक्ता और प्रख्यात कवि, भारत रत्न अटल जी की पहचान कुछ शब्दों में करना मुश्किल सा लगता है। देश की राजनीति में बहुत कम ऐसे नेता हुए , जिन्हें देश की जनता ने सिरआँखों में बैठाया।

पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी भी उन्हीं चन्द राजनीतिज्ञों में से एक हैं। वक्त का सितम कहें या या कुछ और, बीमारी के चलते भले राजनीति से अटल जी दूर हो गये हों लेकिन आज भी हर हिन्दुस्तानी के जहन में उनकी याद बसी हुई है।

आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 93 साल के हो गए हैं। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उनका व्यक्तित्व और उनकी बातें ऐसी थी कि ना सिर्फ समर्थक, बल्कि उनके विरोधी भी तालियां बजाए बिना नहीं रहते थे।

अटल जी के जन्मदिन के अवसर पर आज हम आपको उनके द्वारा कही गई कविताओं की कुछ ऐसी पंक्तियों से रूबरू करवा रहे हैं जिन्हें सुनकर विपक्षी दलों के नेता भी वाहवाही करते नही थकते। यही वजह थी कि देश की राजनिति में अटल जी जैसा कोई ओर नही।

1. क्या हार में क्या जीत में , किंचित नही भयभीत में , कर्तव्य पथ पर जो मिला यह भी सही वो भी सही, वरदान नही मांगूगा , हो कुछ पर हार नही मानूंगा।

2. शत–शत आघातों को सहकर जीवित हिन्दुस्तान हमारा जग के मस्तक पर रोली सा शोभित हिन्दुस्तान हमारा।

3. मेरे पास ना दादा की दौलत है और ना बाप की। मेरे पास मेरी मां का आशीर्वाद है।

4. इतिहास में हुई भूल के लिए आज किसी से बदला लेने का समय नहीं है, लेकिन उस भूल को ठीक करने का सवाल है।

5. अगर हमारा देश शक्तिशाली है तो किसी को भी हमारे देश पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं होगी।

6. आप अपने दोस्त बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं।

7. छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।

8. मैं हमेशा से ही वादे लेकर नहीं आया, इरादे लेकर आया हूं।

9. लोकतंत्र एक ऐसी जगह है जहां दो मूर्ख मिलकर एक ताकतवर इंसान को हरा देते हैं।

10. बाधाएं आती है आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों से हंसते–हंसते, आग लगा कर जलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।

11. हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ। गीत नया गाता हूँ।

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