केरल गए और “कोवलम बीच” नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा…

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केरल : हममे से कई लोग ऐसे हैं, जिन लोगो को समुद्र के किनारे घंटों बैठे रहना और ऐसे में उन्हें कई खूबसूरत चीजों को देखने का इंतजार रहता है। आज हम आपको ऐसे ही ”कोवलम बीच” के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप अपनी छुट्टियों को और भी बेहतरीन बना सकते हैं घनी हरियाली से आच्छादित पर्वतमालाएं, नारियल-केले के पेड़ और अरब सागर के लहरों को स्पर्श करती इसकी तटों का तो कोई जवाब ही नहीं है। आयुर्वेद के खजाने से भरे और चन्दन के पेड़ों से सुगन्धित वन केरल के अमूल्य धरोहर हैं। कण-कण में बसी हरियाली ही इस राज्य की मुख्य पहचान है। अगर पर्यटन के दृष्टिकोण से देखा जाय तो लोग यहां मुख्यत: समुद्रतटों और अप्रवाही जल यानि बैकवाटर्स एवं हाउसबोट का आनंद लेने आते हैं। बैकवाटर और हाउसबोट का मुख्य गड़ तो अल्लेप्पी में है, लेकिन तटों के मामले में तो कोवलम ही सर्वश्रेष्ठ है।

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यहां ऑफ सीजन में भी घूमने आते हैं पर्यटक

केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम या तिरुवनंतपुरम से मात्र 16 किमी की ही दूरी पर है, कोवलम तट। यहां दिसंबर से मार्च तक सर्दियों के मौसम में टूरिस्ट्स की भीड़ लगी रहती है, लेकिन जून के ऑफ-सीजन वाले महीने में भी लोग यहां घूमने आते हैं।

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पर्यटकों के लिए गोवा से कम नहीं कोवलम

आपको यहां आकर बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगेगा कि आप केरल के किसी बीच पर खड़े हुए हैं या गोवा में। यहां पर आपको गोवा जैसा ही एहसास होगा। आप चाहें, तो यहां के प्राकृतिक सौंर्दय को आजकल उपलब्ध होटल से भी निहार सकते हैं।

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क्या हैं केरल के स्थानीय रंग

यहां घनी हरियाली से ढके हुए पहाड़, नारियल-केले के पेड़ और अरब सागर के लहरों को स्पर्श करती इसकी तटों का तो कोई जवाब ही नहीं है। आयुर्वेद के खजाने से भरे और चन्दन के पेड़ों की भीनी-भीनी महक आपके मूड तरोताजा कर देगी। साथ ही अगर आपको यहां के मसालों और जायकों का स्वाद चखना है तो आप स्ट्रीट फूड का मजा ले सकते हैं।

क्या है घूमने का बेस्ट टाइम : आप दिसम्बर से मार्च के बीच यहां घूम सकते हैं।

यहां पर क्या है खास : यहां पर चंदन पेड़ों के अलावा आपको केरल की स्पेशल डिश बहुत अच्छी लगेगी।